मार्टिन जॉन की दो कविताएं

छवियां गढ़े जाने की दास्तां                       

छवियां शाश्वत है

जैसे ज़िन्दगी , जैसे मौत , जैसे फ़लक पर चांद सितारे

जैसे सूरज का भभकना , दमकना , चमकना

छवियां गढ़ने की आदिम कथा सृष्टि ने लिखी है

युगों युगों से कथा बांची जा रही है निरंतर

जैसे हरिकथा अनंता

अकाट्य सत्य यह भी है

यही कि

छवियों को माँ का आंचल पनाह देता है

बहलाता , पुचकारता है

ब्लैक बोर्ड का सफ़ेद चाक

मास्टरजी की छड़ी

ब्रेकटाइम का टिफिनबॉक्स

छवियों को दौड़ना सिखाते हैं

ज़िन्दगी से अलग कैसे हो सकती है छवियां

जबकि छविविहीन अदन की वाटिका में

सज़ा पाने के बाद

आदम और हव्वा ने ही गढ़ी थी छवि

 

छवियां गढ़ने की ज़द्दोज़हद की दास्तां

कुरआन के सीने में दफ़न है

बाइबिल के पन्नों पन्नों में दर्ज़ है

कथा को बजरिये गीता ,रामायण गाहे-बगाहे

बंचवाते रहते है छविपरस्तों की जुनूनी भीड़

छवियां सर्वव्यापी है , सर्वकालिक है

जहां जहां जिंदगी की रेलमपेल रही है

जंग के इतिहास में

मौजूदा वक़्त में जो कल इतिहास बनेगा

छवियों की लीला क्रूरता के साथ मौजूद है

हिरोशिमा , नागासाकी , पानीपत , कारगिल , गाजापट्टी

मोसुल , सीरिया तमाम

कई कई छवियों के जन्मने के गवाह हैं

केवल क्रूर और खौफनाक छवियों का गवाह नहीं है इतिहास

ख़ूबसूरत छवियां , सतरंगी छवियां , मनमोहक छवियां

गढ़े जाने की दास्तां भी दर्ज़ है उसमे

 

ज़िन्दगी चैनल देखते हुए

फातिमागुल की मासूम आँखों से बहते समंदर में

कब डूब जाते हैं हम , पता ही नहीं चलता

उसकी सिसकियों की तपिश से

हमारा हिमालय भी जब तब तब्दील हो जाता है

गंगा –जमुना में |

फरिहा की मुस्कान की खुशबू

उसकी मुहब्बत को चुपके से  छू कर आती ख़ुशगवार हवा

हमारी साँसों में घोल देती है खय्याम की रूबाईयां

‘ज़िन्दगी गुलज़ार है ‘

जाने कब ज़िन्दगी जीने की बेशुमार ख्वाहिशों से

लबालब कर देता है हमें |

‘वो हमसफ़र था मगर हमनवाई न थी …….’

पुरकशिश आवाज़ सरहदें नहीं जानती

ढह जाती है सारी सीमाएं गीत के हर हर्फ़ से

मौसिकी की आबो-हवा में तब नहीं होतीं कुर्तुरएन बलूच हमारे सामने

होती है सिर्फ़ एक रूहानी आवाज़ |

सच है , सुख-दुःख , गिले-शिकवे साझा करने के लिए

संस्कृति किसी से पूछ कर नहीं आती जाती

न तो कभी ज़रूरत पड़ती है उसे पासपोर्ट और वीजा की

 

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मार्टिन जॉन

29 अक्टूबर 1954 भोजूडीह , जिला –बोकारो (झारखण्ड ) में जन्म |

शिक्षा – बी. ए |

मूलतः लघुकथाकार | शताधिक लघुकथाएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित | संकलनों में संकलित | आकाशवाणी से प्रासारित | प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत |

सेवानिवृत रेल कर्मी |

पता – अपर बेनियासोल , पोस्ट- आद्रा , जिला- पुरुलिया , पश्चिम बंगाल- 723121 , मो. 09800940477

Emai :martin29john@gmail.com

 

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