मार्टिन जॉन की तीन लघुकथाएं


लाइक

“अरे बेटा , तैयार हो जा | कॉलेज जाने का समय हो गया है |…..कितनी देर से लैपटॉप में घुसे हो !” दादाजी अपने पोते से मुख़ातिब थे |

“वेट ए लिटिल दादाजी !……..लाइक्स गिन रहा हूँ |”

“काहे का लाइक्स भई ?”

“कल हमने मम्मी की डेथ वाली फ़ोटोज फेसबुक और व्हाट्सएप में पोस्ट की थी |”

“तो ?” दादाजी अबोध बालक की तरह प्रश्नाकुल थे |

“यू नो दादाजी , लगभग एक हज़ार लाइक्स मिले हैं |….इतने लाइक्स तो मेरे किसी भी फ्रेंड को  नहीं मिले हैं |…रिकॉर्ड ब्रेक !”

“लाइक !” दादाजी इस शब्द को बुदबुदाते हुए उस दुनिया को समझने की नाकाम कोशिश करने लगे जहां के लोग किसी की मौत को भी बढ़चढ़ कर पसंद करते हैं |

घटना

बाएं हाथ से स्थानीय अखबार का बण्डल दबाए और दाहिने हाथ में अखबार की एक प्रति लेकर हवा में लहराते हुए हॉकर अपने पेशेवर अंदाज़ में चिल्ला रहा था , ‘पढ़िए …देखिए…शहर की सबसे बड़ी , अजूबा घटना….आज के अखबार में …पढ़िए …पढ़िए …!’

लोकल ट्रेन के यात्री इस घटना से अवगत होने के लिए बेताब हो उठे | वह भी उत्सुक हुआ | फ़ौरन जेब में हाथ डालकर उसने एक रुपए के तीन सिक्के निकाले और हॉकर को हवाले कर अखबार की एक प्रति ले ली | प्रति हाथ में आते ही वह प्रथम पृष्ठ के मोटे-मोटे अक्षरों पर एकबारगी टूट पड़ा | लिखा था –

’20दिसम्बर (नि.सं) आप यक़ीन करें या न करें , आज इस शहर में एक अभूतपूर्व घटना घट गयी| यों तो प्रतिदिन ह्त्या , लूट-पाट , आगजनी , छेड़-छाड़ जैसी कोई-न-कोई घटना घटती रहती है | लेकिन पिछले 24 घंटे के अंदर अपने शहर में एक भी घटना नहीं घटी | इस शहर के लिए यह सबसे बड़ी , आश्चर्यजनक घटना है ….’

‘काश ! अपने शहर का मिज़ाज यूं ही बरकरार रहता !” बगलगीर यात्री के होंठो के ये शब्द उसे थोड़ा सुकून दे गया |

सर्वोपरि

भव्य , विराट ग्रंथागार में हजारों महाग्रंथों और दुर्लभ पुस्तकों की भीड़ में सबसे ऊँची ,पहली ही नज़र में दिख जाने वाली ज़गह पर विश्व के महान ग्रन्थ एक ही क़तार में सजे हुए थे | सभी ग्रन्थ अपनी महानता , पवित्रता , सर्वकालिकता , कालजयिता और श्रेष्ठता बोध से अभिभूत , सदियों से गर्वोन्नत मस्तक लिए |

अचानक एक दिन उसी क़तार में एक ग्रन्थ सजा दिया गया |

सुबह का सूरज झरोखों को फांद कर अब उसे ही चूमने लगा था |

ग्रन्थ का शीर्षक था – ‘माँ ‘ ***

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1 Response

  1. Chitranjan Bharati says:

    Aabhashi dunia ka ek katu satya hai

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