मोहन कुमार झा की 3 कविताएं

मोहन कुमार झा

अररिया, बिहार सम्प्रति अध्ययनरत् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मो. 78390450071. हारे हुए लोग अच्छा होता है बेहतर चुननामगर उससे भी अच्छा होता है सबसे बेहतर चुननासिर्फ जीतने वाले नहींहारे हुए लोग भी अच्छे होते हैं। ख्वाब बगैर नींद के भी देखी जा सकती हैआदमी को बनाया जा सकता है देवताएक पल में खत्म हो सकता है सदियों का प्यारकोई एक बात बदल सकती है पूरी जिन्दगी एक झूठा भरोसा पहुँचा सकता है किसी को सूखी नदी के किनारेएक सूखी नदी ले सकती है किसी प्यासे के प्राणएक निर्णय तय कर सकता है मन में धृणा और प्रेम । धर्म तय करता है सम्मानन्याय तय करता है अधिकारएक दुनिया में सबकी दुनिया अलग-अलग मगर सबकी अलग-अलग दुनिया मेंधर्म की ध्वजा एकन्याय का रंग एक ! जीतने वालों में होती है सोने के जैसी चमकमगरहारे हुए लोगों में छिपा होता है पारस और उसकी पहचान मुश्किल से होती है। 2.  सृजन का मूल पर्वत-शिखर पर पहुँचने वाले के मन में होना चाहिए ऊँचाई से गिरने का डर।रेगिस्तान में चलने वालों को आना चाहिए रेतीली आंधी से बचने का तरीका।समुन्दर में जाने वालों को समझ होनी चाहिएहवाओं के रुख की। प्रेम करने वालों कोज्ञात होना चाहिएघृणा का अर्थसाथ रहने वालों को आना चाहिएसहन करना वियोग की पीड़ा।सर्वस्व अर्पित करने वालों कोत्याग देनी चाहिएक्षुद्र प्रतिदान का अनर्थकारी मोह। इस असीम संसार मेंसबकी होती है एक सीमापर्वत समुद्ररेत सब अपनी सीमा में। परन्तु मनुष्य करता है अतिक्रमअपनी सीमा का।मनुष्य प्रेमी है प्रेम मूल है सृजन का।मनुष्य अपराधी नहींसर्जक हैसौन्दर्य का । 3. जो हम चाहते हैं जैसे सब जाते हैं और लौटकर नहीं आते,हम भी चले जाएंगे !जैसे सब चुप हो जाते हैं और फिर कभी नहीं बोलतेहम भी चुप हो जाएंगे !जैसे धीरे-धीरे आग ख़त्म हो जाती है और धुआँ बचा रहता हैहम भी ख़त्म हो जाएंगे ! उजालों में साज़िश बहुत होती हैइसलिए हम हो जाना चाहते हैंगहरी अंधेरी रात !फूलों को हार बनाकर बेच दिया जाता है बाज़ार मेंइसलिए हम हो जाना चाहते हैं धूलईमानदारी छलावा बन गया है अबइसलिए हम हो जाना चाहते हैं एक पवित्र गलती ! हम नहीं चाहते हैं एक अन्तहीन अन्तराल अपने अकृत्य अपराध के प्रायश्चित के लिए !हम दया नहीं मांगते हैं हम याची हैं जीवन की अभिलाषा के ! हम चाहते हैं आना वापस नदियों-तालाबों के घोंघे होकरहम चाहते हैं शरमाना रोजछुईमुई के पौधे होकरहम चाहते है जीना-मरना-जीना सदियों तकहर बार मरकर जी उठने की कला सीखकर !

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