दिल्ली में कब मरी यमुना? यमुना का हत्यारा कौन?

नीलय उपाध्याय

यमुना का हाल जानने पैदल निकले नीलय उपाध्याय

 

कब मरी यमुना ?
किसने मारा दिल्ली में यमुना को

पता करना आसान है।
वज़ीराबाद वो जगह है जहाँ कुछ दिन पहले सूर्य तनया यमुना का दिल्ली मे प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। इस जगह पर बना बैराज यमुना की धार को आगे बढ़ने से रोक देता था और जबरन उसका पानी शोधन के लिए भेज दिया जाता था। यह तारीख तो स्वर्णाक्षरों में अंकित है। यमुना के गर्भ को, घाट को तट को बांधा गया और लूट लिया गया।
आज भी मोटे मोटे पाइप यमुना के सीने पर लदे है। अगर दर्ज कर सकते हो तो दर्ज करो मुकदमा?
दिल्ली में जितने नाले थे ,जमुन बन चुके है।

यमुना को मार कर अब किसका पानी पी रहे हैं?
यात्रा में संबंधित सिंचाई विभाग के एक व्यक्ति से मिला। नाम न लेने की शर्त पर उसने बताया कि सर यमुना का पानी अब तो बस २८ दिन लिया जाता है, अम्टूबर-नवम्बर मे। अन्य दिनों में नहीं लिया जाता। इस साल तो मात्र १९ दिन ही लिया गया था। यमुना का हाल सर बूढी वेॆश्या सा हो गया है। यमुना के इलाके में आने से बचते है लोग।
मेरे लिए यह सदमे की तरह था।
मैंने पूछा- तो कहां का पानी पी रही है दिल्ली?
उसने बताया-चालीस प्रतिशत गंगा का,३० प्रतिशत हरियाणा और बाकी भू गर्भ का जल। याद आया गंगा का भी यहीं हाल होने वाला है। ये जिस नदी का पानी पिऎंगे उसका यहीं हाल करेंगे। मुझे किसी ऎसे आदमी की तलाश थी जिसने यमुना को मरने से पहले कुछ कहते सुना हो।
यमुना चीखती रही होगी।
उसकी चीखों में छिपा है यह राज कि दिल्ली उंचा सुनती है।

हम यमुना के गांव में गए। रेत यमुना की थी और उसने सब कुछ देखा था । रेत बता भी रही थी मगर उसकी भाषा हमें नहीं आती थी। भैंसा गाडी से उतर राह में एक लडके ने बताया कि मेरे अब्बा ने देखा था
क्या देखा था?
वज़ीराबाद के एक तरफ यमुना का पानी एकदम साफ़ और दूसरी ओर एक दम काला होता था।
अब दोनों तरफ़ काला है।
मोटी मोटी पाइपें गवाह है। कार्यालय गवाह है कि उस नदी का जल लूटा जाता था। उस लडके के अब्बा की उम्र नहीं जानता पर उसने यमुना को जिन्दा देखा।कब मरी इसकी तारीख नही मिली, एक अंदाजा मिला।

तिथि मिल गई, जब सिंचाई विभाग वाले भाई ने कहा-
यह बात घर घर के कलेंडर में टंगी है साहेब, अखबारों में छपी थॊ।सर अब यमुना के पानी में अमोनिया इतना बढ गया है कि शोधन के बाद भी बाहर नहीं जाता। बीमारी फ़ैल जाती है। जो लोग चुल्लू से आचमन करते थे ,वे अब पांव भी नहीं डालना चाहते यमुना में।
सर एक बात बोलूं
बोलो ,मैं तुम्हारा नाम नहीं बोलूंगा।
यमुना की बात करने पर सीने में दर्द हो जाता है।
अमोनिया वाला बाद की घटना है यमुना तो सर उपर ही लुट जाती है।

ये यमुना ही है।

उपर कितने उपर ।
यमुना को गंगा के पहले मरना था।
एक मरी हुई नदी का नहीं, मरी हुई सभ्यता का चित्र है. गंगा पर सभ्यता का आक्रमण अंग्रेजों के काल में हुआ। यमुना पर सभ्यता का आक्रमण समझ में आता है तुगलक के काल में। तुगलक वंश के शासकोंने यमुना को दिल्ली की तरफ़ लाने का प्रयास किया मगर सफ़ल न हो सका। उसने इस अभियान का नाम रखा था, नहरे बहिस्त।

शाहजहाँ (१६२८-१६५८) के लिए यमुना को मोडकर दिल्ली लाने का यह काम तत्कालीन इंजीनियर अली मर्दान खा के द्वारा किया गया था । यह यमुना का अपना वास्तविक पथ नहीं है। इसलिए एक नदी का मार्ग बदल दो तो क्या परिणाम आते है,देखने की जगह है। यहां उपर आकर हमारे सामने यमुना को देखने लिए दिल्ली में तीन सभ्यताएं है।
मुगल काल, अंग्रेजों का काल और आजादी के बाद का काल।
कब मरी यमुना…?
सबने कहा-
रेत ने हवा ने अखबार ने और इलाके की जमीन के दलाल का सबका कहना है

शव परीक्षण की रिपोर्ट

यमुना की मौत का काल आजादी के बाद का है।
यानी आजाद सरकार ने इसे मारा है।

नदी की मौत हुई है।
सत्य दिख रहा है।
तारीख दिख रही है, आजादी के बाद चाहे जो यहां सरकार में रहा है उस पर यह अभियोग है। आजादी के बाद की सत्ता को इसकी जबाब देही लेनी होगी।

नीलय उपाध्याय के फेसबुक वॉल से साभार

सारी तस्वीरें नीलय उपाध्याय के फेसबुक वॉल से साभार

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