निशान्त की 8 कविताएं

निशान्त

कविताओं का बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद।

भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के तहत पहला काव्य संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित

उसके बाद राजकमल प्रकाशन से दूसरा काव्य संग्रह ‘जी हां, मैं लिख रहा हूं’ प्रकाशित

पुरस्कार :  भारत भूषण अग्रवाल सम्मान, नागार्जुन शिखर सम्मान, मलखान सिंह सिसौदिया पुरस्कार

मेल—nishant.bijay@gmail.com

मोबाइल–09239612662

1-उसका रोना

उसकी बोतल का नाम मिल्टन है

उस से वह पानी पीती है

वह उसकी प्रिय बोतल है

बोतल खो गई

वह रोने लगी

इतनी रोई इतनी रोई कि

आसुओं के जल में बहकर बोतल उस तक वापस आ गई

रोने को एक हथियार की तरह

वह करती है प्रयोग

बचपन का वह हथियार

आज भी कारगार है

अभी अभी सिर्फ आंखें भरकर

रोक लिया है उसने

चौथा विश्वयुद्ध

कभी कभी रोना

दुनियां को तबाह होने से बचाता भी है।

2 अकेले में तुम्हारी उपस्थिति 

बियाबां में

एक पेड़ खिंचता है

समुद्र में एक डोंगी

भीड़ में तुम

अकेले में

तुम्हारी उपस्थिति ।

3-पियक्कड़ पति की पत्नी से एक मुलाकात

नैतिकता एक भारी पत्थर है

सीने पर बैठा रहता है

पहली शादी की असफलता

दूसरे तीसरे चौथे प्रेम की संभावना को दूर दूर रखती है

बस कभी कभी बात कर लेती हूं

अच्छा लगता है

जैसे अभी

असफलता

कितनी डरावनी होती है

तीस साल की मुझ लड़की से पूछे

मेरा तीन साल का बच्चा

किसी से नहीं डरता,अपने पिता के अलावा

पहले प्रेम में

फिर शादी में

अब जीवन में नैतिकता के साथ

जीवन का बोझ

कंधे थक गए है

किसे दिखाए

ना, ना…

अच्छा लगना

अच्छा होना नहीं है

घर परिवार समाज

ओ पढ़ा लिखा मास्टर तक

मेरे अंदर एक दरवाजा देखता है

अली बाबा का खजाना देखता है

कैसे समझाऊं

कैसे समझू

किस से कहूं

कैसे निबटू

मेरे बच्चे

मैं एक औरत थी

अभी दोनों हूँ

डरती हुई भी

लड़ती हुई भी।

  1.  भरम

हाथ में चाकू ले

रात को कई टुकड़ों में काट डाला

नींद, किस चिड़िया का नाम है?

दिन के कुछ हिस्सों को

बाल्टी में डाल, फिच कर

अलगनी पर उल्टा लटका आई

दिन क्या होता है?

रात दिन एक भरम है

मालिक कहता है

-कामचोर कही की

कल समय से आना

या मत आना।

5-एक प्रधानमंत्री को याद करते हुए

अंधेरे में एक चिड़िया बोली

कोई जानवर बोला

अंदर भी कोई बोला

वही नहीं बोला

नहीं बोला

चुप्पा कहीं का

6-कोणार्क के पास 

ठीक इसी तरह टूट -फूट कर खड़ा रहता हूं

दूर नहीं, पास लहरा रही होती हैं

समस्याएं

जीवन रेत की तरह हो रहा होता है

आता हूं तुम्हारे पास

अभी उसी दिन आया था

कोर्ट में लड़कर

प्रेम में पड़कर

हर परेशानी में

इसी तरह खड़ा होना चाहता हूं

टूट -फूट कर भी सीधा

कई शताब्दियों तक

इसी तरह।

7-रविवार,तुम्हारे साथ

तलाक का क्या है

आज नहीं तो कल होगा

उम्र एक मसला जरूर है

समय जहाँ दीवार पर कैलेण्डर की तरह है

कई सालों से हम

एक दीवार ही नहीं बना पा रहे हैं

घरवाले कैलेंडर लिए

भटक रहे है

दरियां से समंदर

समंदर से आसमां तक

अभी उसी दिन

बाजार से सब्जी खरीदकर लाया तो

तुमने लाड़ से कहा

बच गई मैं,नहीं तो सारी जिंदगी

तुम्हारी लाई हुई सड़ी सब्जियां बना रही होती…

और क्या क्या कहा था

मुस्करा मुस्करा कर…

प्रेमिका ही नहीं

पत्नी भी नहीं

एक नाम नहीं

एक लड़की नहीं

दीवार पर टांग दी जानेवाली कैलेंडर नहीं

कुछ और भी हो

समय

घड़ी और कैलेंडर नहीं होता

कुछ रिश्ते को

हम परिभाषित नहीं कर पाते

मैं अपनी पत्नी को पैसे देता हूँ

उस से खुद नहीं

मेरा वकील बात करता है

प्यार किस चिड़िया का नाम है

किस देश में मिलता है

उसका वकील जानता है

तुम्हें पैसे नहीं देता

तुम कहती हो प्यार भी नहीं करता

रात को ग्यारह बजे दरवाजा खोल कर

अंदर आने देती हो

कहता हूं पत्नी से तलाक ले लूं

तुम कहती हो जरूरत क्या है

आज रविवार है

तुम्हारी छुट्टी है

तुम्हारे पसन्द की सब्जी खरीदकर लाया हूं।

तुम कहती -बच गई मैं,नहीं तो सारी जिंदगी

तुम्हारी लाई हुई सडी सब्जियां बना रही होती…

शादी का क्या है

आज नहीं तो कल करूँगी

घरवाले तुमसे नहीं करेंगे

न करे

उनके अपने अरमान है

उसे वे पूरे करे

और वैसे भी

तुम तो साले सेकेंड हैंड माल हो

इतना काफी है मेरे घरवालों के लिए

हां हां हां…

रविवार,छुट्टी के दिन आना

मेरे हाथ की

दुनिया का सबसे खराब खाना खाकर जाना

अब मुंह मत फुलाओ

इधर आके चुपचाप खाओ

मरने से पहले,भूत मत बन जाओ।

8-हाऊ वाज द डे

हाऊ वाज द डे?

कहकर

चेहरे पे मौत की कालिख पोत दी

सहकर्मी मित्र ने

नहीं पूछा

-पति की तबियत कैसी है?

-और भी कोई परेशानी?

या कुछ भी और…

अंग्रेजी का एक वाक्य

चीरकर चला गया

मुझे

हिंदी में मैंने जवाब दिया

-ठीकठाक।

और घाव

सील गई।

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