मैं पतझड़ में बसंत लिख रहा हूं

नित्यानंद गायेन

 

आधुनिक हो गया है हत्यारा

बहुत आधुनिक हो गया है
हत्यारा |
उसने सीख ली है
नई तकनीक
अब वह हथियार से नहीं करता वार
नहीं मिलते उसके हाथों में
खून के धब्बे
अब उसके इशारों पर हो जाते हैं
हजारों क़त्ल एक साथ |

 मैं पतझड़ में बसंत लिख रहा हूँ

तुम्हारी सुन्दरता पर फ़िदा होने वाले
महसूस नहीं करेंगे
तुम्हारी वेदना को ,
तनहाई को |
वे सभी सुन्दरता के कायल हैं
पसंद नहीं उन्हें उदासी
अंधकार से नफ़रत है उन्हें
मैं उदासी में
तुम्हारे लिए
गीत लिख रहा हूँ …
मैं पतझड़ में
बसंत लिख रहा हूँ |

 

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