परिकथा का नववर्ष अंक

परिकथा का जनवरी-फरवरी 2020 अंक नववर्ष अंक है। इस अंक में अच्छी कहानी की अवधारणा और पहचान पर बहुत ही सार्थक परिचर्चा की गई है। कथाकार हरियश राय द्वारा संयोजित इस परिचर्चा में डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी, डॉ खगेंद्र ठाकुर, मधुरेश, राजेंद्र कुमार, विजय राय, जानकी प्रसाद शर्मा, तरसेम गुजराल, कर्मेंदु शिशिर और सूरज पालीवाल ने अपने विचार रखे हैं। आलोचक और वागर्थ के संपादक डॉ शंभुनाथ का आलेख अच्छी कहानी चिड़िया की तरह है में इस विषय पर चर्चा की गई है। अच्छी कहानी की अवधारणा पर रमेश उपाध्याय की टिप्पणी है। अंक में सुभाष पन्त, सुरेंद्र मनन, नूर ज़हीर, राजेंद्र दानी, अशोक शाह, स्वप्निल श्रीवास्तव, संजय कुंदन, नर्मदेश्वर,  शिवदयाल, सैली बलजीत, दीपक शर्मा, अश्विनी कुमार, अशोक कुमार, आशा पांडेय, मंजुश्री और सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कहानियां हैं। युवा यात्रा में प्रशांत बेबार, आलोक कुमार मिश्रा और आयशा आफरीन की कहानियां हैं। इस विशेषांक में कुल 19 कहानियां हैं। प्रज्ञा के सद्यप्रकाशित उपन्यास धर्मपुर लॉज का एक अंश भी इस अंक में है।

इसके अलावा रमाकांत श्रीवास्तव ने अपने आलेख एक बंजारा लेखक  के जरिए स्वयं प्रकाश को श्रद्धांजलि दी है। कथायात्रा में हरियश राय ने हाल फिलहाल की उत्कृष्ट कहानियों की पड़ताल की है।

इसके अलावा अन्य सभी स्थायी स्तंभ हैं।

पत्रिका प्राप्त करने के लिए विक्रय/प्रसार अधिकारी अरविंद कुमार सिंह से 9971898709 नंबर पर बात की जा सकती है।

 

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