परितोष कुमार ‘पीयूष’ की दो कविताएं

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4 Responses

  1. Paritosh kumar piyush says:

    शुक्रिया

  2. प्रभात मिलिंद says:

    सुन्दर, विचारोत्तेजक कविताएँ. युवा और संभावनाशील कवि परितोष पीयूष को बधाई.

  3. कुमार विजय गुप्त , munger says:

    एक दिन हो जायेगा
    समस्त
    मानवीय मूल्यों का ह्रास,
    टूटेंगे रिश्ते,
    मरेगी संवेदनाएं
    सिकुड़ती दुनिया के
    साथ-साथ
    रो-रोकर
    कह रहा था
    कि कैसे जनता
    दफन कर दी जायेगी/हो जाये…..अच्छी कविता की शानदार पंक्तियाँ . भाई पीयूष जी को बधाई !

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