गजेन्द्र रावत की कविताएं

1. सहज

कौवा
मेरी तरह नहीं लेता
सहज
मौत को
मैंने उसे
एकजुट हो
आकाश सर पर उठाते देखा है…

2. बेरहमी

अंधेरा
उन्हें पसंद है
वे नहीं देखना चाहते
अपना भी चेहरा
रोशनी जो दिखा देती है
उनके भीतर जमे हुए डर को
इसीलिए
वो हर शै
जो देती है रोशनी
मिटा दी जाती है
बेरहमी से….

3. खोज रहे हैं

आज
वे चल पड़े हैं
नंगे पाँव
जख्म, छाले साथ लेकर
दुनिया नापने….
पाँव-पाँव
खोज रहे हैं
नो मैंन्स लैंड
वो जगह
जहां कोई देश न हो !

——

गजेन्द्र रावत
मो॰ 9971017136

ईमेल rawatgsdm@gmail.com

8 Responses

  1. Anonymous says:

    बेहतरीन कविताएं बहुत बहुत बधाई रावत जी
    आनंद क्रांतिवर्धन

  2. Anonymous says:

    बेहतरीन कविताएं बहुत बहुत बधाई रावत जी
    आनंद क्रांतिवर्धन

  3. आनंद क्रांतिवर्धन says:

    वाह बेहतरीन कविताएं

  4. Anonymous says:

    बेहतरीन कविताएं बहुत बहुत बधाई रावत जी
    आनंद क्रांतिवर्धन

  5. Anonymous says:

    बेहतरीन कविताएं बहुत बहुत बधाई रावत जी
    आनंद क्रांतिवर्धन

  6. आनंद क्रांतिवर्धन says:

    बेहतरीन कविताएं
    बहुत-बहुत बधाई

  7. आनंद क्रांतिवर्धन says:

    बेहतरीन कविताएं
    बहुत-बहुत बधाई

  8. अद्भुत रचना संसार है आपका..अंतस तक उतराती रचनाएं। हार्दिक बधाई

Leave a Reply

Your email address will not be published.