सुभाष झा की कविताएं

शौच से शमशान तक

खुले में शौच करने वाले

लगातार कम हो रहे हैं

मुखिया जी ने

‘खुले में शौच मुक्त’

का बोर्ड बनवा लिया है

रबी की फ़सलें

अब पक चुकी हैं

उनकी कटाई चालू है

प्रशासन ने आस-पास

के गाँवों के चौक-हाटों

को निषेध कर दिया है

शमशान जाने वाले

लगातार बढ़ रहे हैं

खुले में शौच करने वाले

लगातार कम हो रहे हैं

मैंने तो पहले ही कहा था

जिसे तुम

बगल के घर

के चूल्हे की

आग से निकला धुआं

समझ बैठे थे

वास्तव में वह

ज्वाला थी —

अमानवीयता की

अप्रीति की

घृणा की

बैरभाव की

पीड़ा थी —

असमता की

पक्षपात की

अन्याय की

धर्मांधता की

व्याधि थी —

असहिष्णुता की

प्रतिशोध की

अहंकार की

अंतर्विरोध की

पड़ोस से आती

जिस ध्वनि को तुम

मामूली मनमुटाव

नगण्य अनबन

समझ बैठे थे

वास्तव में वह

शोर था —

मतभेद का

असामंजस्य का

कलह का

अनैक्य का

कोलाहल था —

अव्यवस्था का

विप्लव का

रोष का

उपद्रव का

अमर्ष था —

अपमान का

दोहन का

शासन का

दमन का

उस दिन

अनायास ही मिली

वह अप्रत्याशित कर्तल ध्वनि

जिसे तुम

अपनी परायणता का पुरस्कार

समझ बैठे थे

वास्तव में वह

शाबाशी थी तुम्हारी —

दासता की

असंयमिता की

चाटुकारिता की

अनर्गलता की

वह पतन था तुम्हारी–

नैतिकता का

मनुष्यता का

विचारशीलता का

विवेकपूर्णता का

वह उद्घोष था तुम्हारी —

हुक़्म-परस्ती का

अन्ध-अनुसारिता का

अनियंत्रण का

धृष्टता का

मैंने तो पहले ही कहा था।

लॉकडाउन

कितने पहर से

तुम्हें देखा नहीं है

रोज़ सवेरे

फ़र्श बुहारते वक़्त

फिर रसोई में

खाना बनाते हुए

फिर कमरे में

कुर्सी पर बैठे

या बिछौने पर लेटे

या मेज़ पर रखी

तुम्हारी तस्वीर को देख

सोचता हूँ

कब ख़त्म होगा यह सब

कब प्रकृति का सबक थमेगा

जो कभी न थमा तो?

रोज़ शाम को छत पर टहलते

रवि को ओझल होते देख

तमस के अमित विस्तार में

ग्रहों उपग्रहों तारों की ओर

टकटकी लगाये देखता हूँ

और देखता हूँ

उनके मध्य के अपरिमित शून्य को

उस दर्पण की लालसा में

जिसमे तुम्हें देख सकूँ

जो अब तक नहीं दिखा

जो कभी न दिखे तो?

कितना अटपटा है

उसी आसमान में

उन्हीं ग्रहों उपग्रहों तारों की ओर

टकटकी लगाये

तुम भी रोज़ देखते हो

और तुम्हें भी वह दर्पण

अब तक नहीं दिखा

पर तुम आस मत खोना

कि आस से अभिलाषा का पथ

दुर्गम है पर सीमित है

जो असीमित हुआ तो?

——-

सुभाष झा एक प्रोजेक्ट-फाइनेंस कंसल्टेंट हैं जिनका जन्म बिहार के समस्तीपुर ज़िले में हुआ| वर्तमान में वह पटना में रहते हैं|

संपर्क :  9006466620

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