बच्चों के लिए राम करन की कविताएं

  1. बादल! आना मेरे गाँव

बरगद बाबा खड़े मिलेंगे,

जटा-जूट से बढ़े मिलेंगे।

झुककर छूना उनके पांव,

बादल! आना मेरे गाँव।

पके रसीले आम मिलेंगे,

लँगड़ा, बुढ़वा नाम मिलेंगे।

और मिलेगी पीपल छाँव,

बादल! आना मेरे गाँव।

घर-घर ठाड़े नीम मिलेंगे,

दातुन लिए हक़ीम मिलेंगे।

चिड़ियां करती ‘ची-ची-चांव’,

बादल! आना मेरे गाँव।

छम-छम-छम-छम बूंद गिरेंगे,

छप-छप-छप पतवार करेंगे।

तैराएँगे हम सब  नाव,

बादल!आना मेरे गाँव।

हरे खेत में धान रहेंगे,

बहुत प्रेम-सम्मान करेंगे।

रुकना थोड़ा सबके ठाँव,

बादल! आना मेरे गाँव।

  1. छबीली तितली

काली-पीली-नीली तितली,

मटमैली-चमकीली तितली।

पंख हिलाकर उड़ी गगन में,

नारंगी-चटकीली तितली।

रोली-सी रंगीली तितली,

लगती बहुत छबीली तितली।

पंख सुनहले और मखमली,

सुंदर बहुत सजीली तितली।

भले नहीं बतियाती तितली,

पर हँसती-मुस्काती तितली।

हरी-फिरोजी कई बिंदियाँ,

पंखों पर सजवाती तितली।

एंटीना से झाँकी तितली,

खूब निराली बाँकी तितली।

है महरून-गुलाबी-खाकी,

पंखुड़ियों से ताकी तितली।

खुद को बहुत सजाती तितली,

फिर भी बहुत लजाती तितली।

धूसर, चाँदी और बैंगनी,

रंग कहाँ से लाती तितली?

उड़ी एक चितकबरी तितली,

रस-गंधों की खबरी तितली।

प्यूपा से निकली है बनठन,

रंग-भरी है अबरी तितली।

बलखाती-इठलाती तितली,

इंद्रधनुष-सी आती तितली।

मुझको पास बुलाती अपने,

कलियों पर मँडराती तितली।

प्रतिदिन आती-जाती तितली,

स्वप्न नए दे जाती तितली।

जहाँ-जहाँ भी फूल खिले हों,

वहाँ पहुँच ही जाती तितली।

  1. खुशियां लेकर आना साल!

नई-नई कुछ बातें लाना,

पौध-पौध नव फूल लगाना।

नया-नया हो सबका हाल,

खुशियां लेकर आना साल!

ठंड-ठंड में धूप खिलाना,

आंगन द्वारे तुम मुस्काना।

खिल-खिल करते बाल गोपाल,

खुशियां लेकर आना साल!

धरती होवे फसलों वाली,

और भरी हो उनकी बाली।

बच्चा-बच्चा हो खुशहाल,

खुशियां लेकर आना साल!

गाँव-गाँव में बादल लाना,

जीव-जंतु के प्यास बुझाना।

भरो लबालब पोखर ताल,

खुशियां लेकर आना साल!

  1. नानी और कहानी

‘न’ से नानी, ‘न’ से नाना,

नानी के घर आना-जाना।

नानी ऐनक पहने रहती,

और कहानी कहती रहती।

उसमें रहती बूढ़ी दादी,

पहने थी वो कुर्त्ता खादी।

बूढ़ी दादी बड़ी सयानी,

उसकी चूनर धानी-धानी।

जंगल-जीवन उसके साथी,

मोर, हिरन, औ बंदर हाथी।

हाथी ऊँचा सैर कराता,

पर्वत नदी उसे दिखलाता।

मोर पंख थे बडे़ सजीले,

नीले हरे रंग चटकीले।

सिर पर अपने ताज सजाता,

खुश हो जाता नाच दिखाता।

हिरन कुलांचे भरता था,

बंदर खो-खो करता था।

सुनते होती आधी रात,

फिर सो जाते नानी साथ।

  1. नववर्ष

जनवरी में दे देना धूप,

फरवरी का सुंदर हो रूप।

मार्च खिलखिलकर बने अनूप,

मिले आकर अप्रैल सहर्ष।

हर्ष लेकर आओ नववर्ष।

मई में उपवन देंगे छांव,

जून में जाएंगे हम गांव।

जुलाई लेकर आये नाव,

छमाछम वर्षा का उत्कर्ष।

हर्ष लेकर आओ नववर्ष।

खुलेंगे फिर से सब स्कूल,

खेल में होंगे हम मशगूल।

सितम्बर में मौसम अनुकूल,

करेंगे धान्य द्वार स्पर्श।

हर्ष लेकर आओ नववर्ष।

दशहरा का होगा मेला,

अक्टूबर में ठेलमठेला।

नवम्बर में प्रकाश बेला,

अंधेरों का होगा अपकर्ष।

हर्ष लेकर आओ नववर्ष।

दिसंबर ठंडा-ठंडा माह,

हमें कर जाएगा आगाह।

लगाओ अपने मन में थाह,

किया क्या बीते पिछले वर्ष?

हर्ष लेकर आओ नववर्ष।

  1. जूता जी के डाक्टर

जूता जी के डाक्टर,

इसकी नाड़ी भाँपकर।

जूता है बीमार मेरा,

दवा करो इसे जाँचकर।

इसकी गंदी आदत एक,

मुझको है यह काटता।

हौले-हौले चलती हूँ मैं,

टीचर मेरा डाँटता।

अंजर-पंजर ढीले इसके,

करो सिलाई साटकर।

इसके सारे गड्ढे भर दो,

फेवि-क्विक से पाटकर।

अपनी फीस बता दो, भैया!

बट्टे-सट्टे काटकर।

जाना है स्कूल मुझे,

जूता जी के डाक्टर।

  1. जंगल जलेबी

जंगल जलेबी,

खूब फलेगी।

एक जलेबी,

बकरी लेगी।

एक जलेबी,

खाला को देगी।

जंगल मे उसको,

भेंड़ मिलेगी।

एक जलेबी,

उसको देगी।

मिलकर गपशप,

खूब चलेगी।

जंगल मे छाया,

धूप मिलेगी।

भेंड़ कही – तुम,

कम्बल लोगी?

बकरी पूछी –

ठंड में दोगी?

दोनों हँसकर,

गले मिलेंगी।

जंगल जलेबी,

खूब फलेगी।

  1. नींद परी

चाँद-तारों का शामियाना,

रात बुने जब ताना-बाना।

साँझ ढली हो जुगनू भरी,

हौले से आना नींद परी!

आना, आना, पलकों में आना,

फिर बन जाना स्वप्न सुहाना!

लाना, लाना, जादू-छड़ी!

हौले से आना नींद परी।

खेल खिलौने भर भर लाना,

बिन बोले तुम घर में आना!

लाना पिटारा भरी भरी,

हौले से आना नींद परी!

जादू से इक बाग बनाना,

रंग-रंग के फूल खिलाना!

मिल सब गायें स्वर-लहरी,

हौले से आना नींद परी!

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राम करन

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के पाकरडाँड़ गांव में 25 मई 1975 में जन्म। जुलाई 1993

में भारतीय वायु सेना में शामिल मिल। 2012 में सेवा निवृत्त।

सम्प्रति – बेसिक शिक्षा परिषद, उ0प्र0 में शिक्षक।

सम्मान – कथादेश राष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता 2019 में प्रथम पुरस्कार।

कृतियां

 बाल उपन्यास ‘मंतुरिया’ (प्रकाशन विभाग भारत सरकार के अंतर्गत प्रकाशनाधीन)

 कहानियां, कविताएं एवं लघुकथाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

संपर्क

अपरा सिटी फेज – 4

ग्राम व पोस्ट – मिश्रौलिया

जनपद – बस्ती, उत्तर प्रदेश

पिन – 272124

मोबाइल नं0 – 8299016774

इमेल –  ramkaran0775@gmail.com

1 Response

  1. बलदाऊ राम साहू says:

    सभी कविताएं बहुत सुन्दर हैं। बधाई

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