राजेश ‘ललित’ शर्मा की 4 कविताएं

राजेश’ललित’शर्मा

बी-९/ए:डी डी ए फ्लैटस

होली चाईल्ड के पीछे

टैगोर गार्डन विस्तार

नई दिल्ली -११००२७

  1. ज़ख्म

ज़ख़्मों पर

मरहम नहीं

नमक लगा

बना रहे घाव

उठती रहे टीस

दर्द की आह निकले।

याद रहे हमेशा

किसने दिया था ?

ये जख्म !!

  1. तन्हा

कुछ देर

इंतज़ार करो,ए दोस्त

ज़िंदगी ज़रा

घूमने गई है

मैं तन्हा हूँ

वो लौटे तो

दिन की शुरुआत हो

  1. वक्त

बुरा है तो क्या

वक्त ही तो है

गुज़र जायेगा

अच्छा भी तो था

गुज़र गया

चलने दो

वक्त को अपनी चाल

संभल नहीं सकता

कोई भी

ठोकर खाये बिना।

  1. ज़िन्दगी

जी तो रहा हूँ

मगर ऐ ज़िंदगी

तुझसे कटा कटा सा हूँ

ध्यान से पढ़ना

ज़रा ये खबर

अख़बार फटा फटा सा हूँ

मत ढूँढो सकून

शहर में ऐ दोस्त

आदमी ज़रा बँटा बँटा सा हूँ

कहाँ साया देगा

सूखा पत्ता ऐ राही

दरख्त से बस सटा सटा सा हूँ

पूछ लो सवाल

कोई भी इनसे

जवाब बस रटा रटा सा हूँ।

सँभल संभल कर
जी लो उम्र अपनी
लम्हा लम्हा घटा घटा सा हूँ

One comment

  1. लिट्रेचर प्वाइंट का बहुत आभार पाठकों के समक्ष रचनाओं को पहुँचाने का माध्यम बनने का अवसर देने के लिये।
    राजेश ‘ललित’ शर्मा

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