राज्यवर्द्धन की तीन कविताएं

राज्यवर्द्धन

एकांत

भीड़  में
एकांत की तलाश
एकांत में
एक अदद चेहरे की ललक

अकुलाने लगते हैं
शब्द
नि:शब्द में

स्मृतिहीन कैसे बन जाऊँ
वह भी तो संचित सम्पदा है

कलकल छलछल की अहिर्निश ध्वनि बीच
सुनना चाहता है कान
किसी चिर -परिचित की मधुर तान

खेल चॊर सिपाही मंत्री राजा का

बच्चे खेल रहे थे –
चॊर, सिपाही, मंत्री, राजा का खेल

डेस कॊस सिंगल बुलबुल मास्टर

सिपाही सिपाही
चॊर कॊ पकड़ॊ -मंत्री ने आदेश दिया

पकड़ लिया -सिपाही चिल्लाया

राजा के सामने पेश करॊ -मंत्री का आदेश हुआ

चॊर
राजा के सामने
पेश हुआ

राजा ने सुनाई
सजा –
दस नरम दस गरम

सिपाही के
दस नरम दस गरम
चपत खाकर
चॊर की हालत खाराब हुई

देखता रहा –
बच्चॊं के इस खेल कॊ
जिसे बचपन में
कभी हमने भी खेला था

खेल देखते हुए –
अचानक मन मेंआया ख्याल
कि इस खेल में
चॊर, सिपाही, मंत्री, राजा सभी हैं
परंतु प्रजा क्यॊं नहीं

यह प्रश्न
कई दिनॊं तक मथता रहा
मथता रहा……

इस यक्ष प्रश्न कॊ
माँ ,पिताजी, भाई, बड़ी बहन
नानी,दादी,चाची ,बुआ
सभी से पूछा

किसीका भी जवाब
सटीक नहीं लगा
और यक्ष प्रश्न
करता रहा परेशान

परेशानी के दौर में ही
एक दिन सपने में आया
एक दानिशमंद

पूछना चाहता था
उससे भी
यही प्रश्न
……मगर नहीं पूछा

देखकर मेरी ओर
वह मंद मंद मुस्कुराया
…….और कहा –
तुम जानना चाहते हॊ ना कि
इस खेल में प्रजा क्यॊं नहीं है

अरे इस खेल में
चॊर ही असल में-
बेबस प्रजा है

राजा ,मंत्री और सिपाही ने
मिलकर चली है-
चाल

छिपाने के लिए
अपना अपराध
प्रजा कॊ ही
चॊर
घॊषित कर दिया है

और बेचारी प्रजा
जाने कब से
इसकी सजा भुगत रही है
और कह नहीं पा रही कि
वह चॊर नहीं है….नहीं है…

वापसी
दूर…..
बहुत दूर
छॊड़ आया
घर
जहाँ अब जा सकता हूँ
सिर्फ
सपनॊं में ही

एक और
स्वप्न घर
है बनाया
जिसे खूब सजाया संवारा

लेकिन स्वीकार नहीं किया
उसने भी
महानगर के पड़ॊसियॊं की तरह

इंतजार कर रहा हूँ-
घर वापसी का
प्रवासी पक्षी की तरह

लेकिन यह सच नहीं है कि
सभी परिन्दे
घर
वापस  लौटते ही हैं !

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राज्यवर्द्धन

जन्म– 30.6.1960,जमालपुर(बिहार)

  1. धर्मयुग,वामा,नवभारतटाइम्स,हिन्दुस्तान,जनसत्ता,दैनिकजागरण,प्रभातखबर,प्रभातवार्ता,राजस्थानपत्रिका, इंडियाटुडे,आउटलुक,परिकथा,वागर्थ,स्वाधीनता आदि पत्र पत्रिकाओंमेंफीचर्स,लेख,अग्रलेख,रिपोतार्ज,समीक्षाएं प्रकाशित।
  2. हंस, वर्तमान साहित्य, वागर्थ, दस्तावेज, कृति ओर, प्रतिश्रुति, अक्षर पर्व, परिकथा, जनपथ, नई धारा, संवेद, हरिगंधा,समकालीन अभिव्यक्ति, लहक, दोआवा,अंतिम जन,जनसत्ता,दैनिक जागरण,प्रभात खबर, ,प्रभात वार्ता, छपते-छपते(वार्षिकांक),शुक्रवार( वार्षिकांक) आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित।
  • सम्पादन1. ‘विचार’ के सम्पादक मंडल में(अनियतकालीन पत्रिका,जमालपुर से प्रकाशित,फिलहाल बंद) 2.स्वरएकादश’(समकालीन ग्यारह कवियोंके कविताओं का संग्रह)का संपादन,बोधि प्रकाशन,जयपुर से प्रकाशित
  • स्तम्भ लेखनजनसत्ता(कोलकाता संस्करण) में1995 से2010 तक चित्रकला पर स्तंभ -लेखन,

                        2 .नवभारत टाईम्स(पटना संस्करण) में कई वर्षों तक सांस्कृतिक संवाददाता 

  • पुरस्कारजनकवि रामदेव भावुक स्मृति सम्मान 2010(मुंगेर,बिहार)
  • संपर्कराज्यवर्द्धन,एकता हाईट्स,ब्लॉक-2/11ई,56-राजा एस.सी.मल्लिक रोड,कोलकाता-700032
  • e-mail address:rajyabardhan123@gmail.com

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