पति-पत्नी और दर्द

लघुकथा 1

पति (काम से थका हुआ) काम से घर साथ आई पत्नी से- मैडम फटाफट पानी दे दो और अदरक वाली चाय बना दो
पत्नी- रूको, थोड़ा आराम कर लूँ फिर बनाती हूं
पति-तुम समझती ही नहीं हो। थका हुआ हूँ। तुमको अपनी पड़ी है
पत्नी- तो थककर तो मैं भी आई हूँ
पति-ये तो पहले सोचना था, काम का शौक़ तुमको है। घर में रहो और सेवा करो
पत्नी- अरे तो घर में रहकर काम करने वाली औरतें नहीं थकतीं क्या? घर में रहकर भी थक जाऊँगी तो तब भी तुमको बनानी पड़ सकती है चाय।
पति- ज़ुबान मत चलाओ नहीं तो धर दूँगा यहीं. भूल जाओगी ज़ुबान चलाना
पत्नी ने चाय बनाकर पिला दी।
अगले दिन,
थकी हुई पत्नी ने काम से घर साथ लौटे पति से कहा- भई कल मैंने पिलाई थी चाय। आज तो तुम पिला दो
पति-तुम्हारी माँ को तुम्हारे पिता ने कभी चाय पिलाई है जो मैं पिलाऊँ । जाओ चुपचाप ‘अपना’ काम करो।
पत्नी ने फिर चाय पिला दी।

लघुकथा 2

पहला सीन
उसके पति और ससुरालवालों ने पति की शारीरिक बीमारी छिपाकर उसके साथ शादी की, शादी के बाद जब उसे पता चला तो पूरे 6 महीने वो ठीक से सो नहीं पाई, हिम्मत बटोरी, घर ठीक से चले इसलिए नौकरी ज्वाइन की और इस धोखे को अनदेखा कर तन मन धन से पति की सेवा में जुट गई। घर बाहर पति बच्चे सबको संभालती दोहरे बोझ से दबी पत्नी एक दिन बोली- यार बहुत हो चुकी घर-बाहर की ज़िम्मेदारी।अब थक चुकी हूँ। आराम करना चाहती हूँ ।
पति-तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है ना? नौकरी छोड़ने की बात आइंदा सोचना भी मत। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सोचने की?
पत्नी-मैं भी तो इंसान हूँ। आख़िर कब तक झेलती रहूँगी ये सब?
पति- तुम जो कर रही हो वो कोई अनोखा नहीं है। तुम्हारी जगह कोई भी होती वो यही करती। ये ड्यूटी है तुम्हारी।

थोड़ा श्रेय, सहानुभूति, प्रेम भरी बात चाह रही पत्नी को धोखेबाज़ पति ने अहम और कर्तव्य का जूता जड़ दिया था।

दूसरा सीन
अपनी लड़की की शारीरिक बीमारी छिपाकर पिता ने उसकी शादी कर दी।

बात खुलने पर पति भड़क उठा- ये धोखा मुझसे बर्दाश्त नहीं। तुम जहाँ से आई हो, वहीं वापस चली जाओ।
पत्नी- देखो, मैं माफ़ी चाहती हूँ लेकिन ये मेरे पिता ने किया मैंने नहीं।आपको जो दुख पहुँचा वो मैं समझती हूँ। लेकिन मैं आपके और आपके घरवालों को शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी। मैं इस बीमारी के बावजूद सब अच्छे से संभाल लूँगी।
पति- अरे तेरी बीमारी का ख़र्चा कौन उठाएगा? अपने बाप से पैसे लेकर आती फिर इलाज के।
पत्नी- प्लीज़ माफ़ कर दीजिए।मैं नौकरी कर लूँगी। मुझे एक स्कूल में नौकरी मिलने वाली है।
पति- मुझे तेरी शक्ल से नफ़रत हो रही है। चल निकल यहाँ से।
पति और ससुराल वालों ने लड़की को घर से निकाल दिया। पति उसे तलाक़ भी नहीं दे रहा।

 

लघुकथा 3

दो बच्चे थे एक एक साल की उम्र के अंतर के कि अचानक तीसरा भी पेट में आ गया। ख़बर मिलते ही क्रोधित पति ने पत्नी से कहा-बेवक़ूफ़ औरत क्या कर दिया तूने?  कुछ अक़्ल है या नहीं? ज़िंदगी की कोई समझ भी है?
पत्नी–क्या मैं अकेले दोषी हूं?  तुममे इतनी समझ है तो तुम्ही समझा देते।
पति-(तड़ाक) ख़ूब बोल रही है तू ,अब जो करना हो कर,नहीं चाहिए मुझे तेरी ये औलाद
पत्नी चुप।
पति- मुँह पर पट्टी बाँध ली है क्या ****द
पत्नी- गाली क्यों दे रहे हो? बोलती हूं तो कहते हो कि ख़ूब बोल रही है। जो हो गया उसमें तो दोनों की ज़िम्मेदारी है।
पति- ज़्यादा भाषण मत दे और जाकर गिरा दे बच्चा
पत्नी- अब अकेले नहीं जाऊँगी। दोनों बच्चों के टाइम भी अकेले अस्पताल के चक्कर लगाती रही। अब साथ चलो तुम भी।
पति-***ड़ी की, मेरे पास टाइम नहीं है इन फ़ालतू कामों के लिए। जा अपने बाप के साथ जा और अबॉर्शन करा के ही अपनी शक्ल दिखाना।
पत्नी ने पिता के साथ जाकर अबॉर्शन कराया और पति के साथ शादी के 5 साल पूरे कर लिए हैं एक अंदरूनी चुप्पी के साथ

 

 

1 Response

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