रोटियों के हादसे : कविता संग्रह

भूखा बच्चा रोटी समझ
चांद को लपकना चाहता है
लेकिन काट दिये जाते हैं उसके पंख
वो फड़फड़ाता है
छटपटाता है
उसका पंख लेकर
कोई और उड़ जाता है
उसके हिस्से में
ना तो रोटी है ना ही उड़ान
उसके हिस्से में सिर्फ भूख है

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के कविता संग्रह रोटियों के हादसे की एक कविता का अंश। इस संग्रह की कविताओं में आम आदमी के संघर्ष प्रभावी ढंग से उभर कर सामने आया है। पुस्तक पेपरबैक और किंडल दोनों पर उपलब्ध है। अभी खरीदें

 

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