संजीव ठाकुर की पांच कविताएं

प्यासा

हथेलियों में दम कहाँ

उठा पाने की

एक बूँद खुशी ?

 

और फिर

भोजन भी तो चाहिए

अंधे कुएं को !

क्या तुम जानते हो —

मेरे शरीर का हरेक रंध्र

एक –एक कुआँ है

बहुत गहरा

बहुत प्यासा

चट विलीन हो जाती है

बमुश्किल मिली

एक बूँद खुशी

 

अंधी सुरंग

अंधी सुरंग है

यह ज़िंदगी

कुओं और खाइयों से भरी

चमगादड़ की चीख

और

मकड़ों के जालों से बुनी

गधों की लीद

और

श्वानों के मूत्र से लिथड़ी

बाघिन की गंध जैसी बदबूदार

भेड़ियों जैसी हत्यारी

नालों की तरह बहती

काँटों की तरह चुभती

समुद्र की तरह हाहाकार करती

 

बड़ी उदास पुस्तक है

यह ज़िंदगी

इसे आखिर

पढ़ें भी तो कैसे ?

 

स्थगित

 

लंबे ,

चौड़े ,

सूने

जीवन –मरु में

तुम

बनना चाहती हो

बादल का एक टुकड़ा

स्वीकारूँ या नहीं ?

इसी शशोपंज में हूँ ।

कभी लगता है

अकड़ा रहूँ अपनी ही आन में

कभी भीतर से आवाज़ आती है –

अभागे!

मर जाओगे

पानी के बिना ।

 

मैं क्या करूँ ?

निर्णय अब भी स्थगित है !

 

क्रमश:

 

उन्होंने बढ़ाए अपने कदम

मंजिल की ओर

और मुस्कुराए मन ही मन

एक पायदान पर चढ़ते ही

दुनिया उन्हें नामाकूल लगने लगी ।

अगला कदम ऊपर रखते ही

उन्हें आस –पास के लोग ,

संगी –साथी ,

पास –पड़ोसी ,

घर –परिवार वाले

महत्वहीन लगने लगे ।

मंजिल पर कदम रखकर

देखा जब पीछे

दूर –दूर तक

उन्हें कोई नजर नहीं आया ।

वे चढ़ते गए ऊपर

दुनिया होती गई

नगण्य,

अस्तित्वहीन ।

 

सबसे ऊपर चले जाने पर

कैसी लगेगी दुनिया उनको

वे ही जानें !

 

प्रश्न 

 

कभी सोचा है तुमने

तुम्हें आगे लाने के पीछे

जो हाथ है

वह खूनी नहीं है ?

तुम्हें पुचकारने वाले

ओठों में

नहीं बुझा है विष

इसका कोई सबूत ??

 

विश्वसनीयता,

अविश्वसनीयता के बीच

झूलते रहोगे तुम ?

 

संजीव ठाकुर

जन्म  : 29 जनवरी ,1967 मुंगेर [बिहार ]

शिक्षा  : एम.ए,एम.फिल.,पी–एच.डी [दिल्ली विश्वविद्यालय ]

प्रकाशन : नौटंकी जा रही है ,फ्रीलांस ज़िंदगी ,अब आप अली अनवर से ,प्रेम सम्बन्धों की कहानियाँ [कहानी –संग्रह] झौआ बैहार [लघु उपन्यास] इस साज पर गया नहीं जाता [कविता –संग्रह ] मैं भी गीत लिखूंगा, नभ में आया इन्द्रधनुष ,बड़ों का बचपन ,कबूतरी आंटी ,यहाँ ऐसा वहाँ वैसा आदि [बाल- साहित्य ]

संप्रति :  स्वतंत्र लेखन एवं पत्रकारिता

संपर्क : एस एफ 22,सिद्ध विनायक अपार्टमेंट, अभय खंड – 3 ,इंदिरापुरम ,गाजियाबाद ,उ. प्र .

 

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