सपना मांगलिक के दस हाइकू

1

जितना जिया

लिखा बस उतना

लिखूं क्या आगे ?

2

मन अन्दर

दुःख का समंदर

उठे क्यूँ ज्वाला ? ।

3

चीखे खामोशी

द्वंद नाद दिल में

सुने न कोई ।

4

मति भ्रमित

ह्रदय कुरुक्षेत्र

खुलें न नेत्र ।

5

फूटी रुलाई

भरी सूखी जग की

ताल तलाई ।

6

टूटना भला

यूँ कैद आसमां से

कहें सितारे ।

7.

होंगे पागल

किस्सा ये मुकम्मल

होगा तब ही ।

8.

दुनिया मेला

रहूँ बीच भीड़ में

पर अकेला

9.

जल जाओगे

नहीं ठंडी वो राख

स्त्री अलाव

10.

लागे न जिया

फिरे डाल डाल क्यूँ?

मन गौरैया ।


नाम – सपना मांगलिक

शिक्षा-एम्.ए ,बी .एड (डिप्लोमा एक्सपोर्ट मेनेजमेंट )

प्रकाशित कृति-पापा कब आओगे,नौकी बहू (कहानी संग्रह), सफलता रास्तों से मंजिल तक ,ढाई आखर प्रेम का (प्रेरक गद्य संग्रह), कमसिन बाला ,कल क्या होगा ,बगावत (काव्य संग्रह ), जज्बा-ए-दिल भाग –प्रथम,द्वितीय ,तृतीय (ग़ज़ल संग्रह), टिमटिम तारे ,गुनगुनाते अक्षर,होटल जंगल ट्रीट (बाल साहित्य), बोन्साई (हाइकु संग्रह )

संपादन –तुम को ना भूल पायेंगे (संस्मरण संग्रह ), स्वर्ण जयंती स्मारिका (समानांतर साहित्य संस्थान), बातें अनकही (कहानी संग्रह )

पता-एफ- 659,बिजलीघर के निकट ,    कमला नगर आगरा 282005

(up)दूरभाष –09548509508,व्हाट्स अप्प -07895813848

email-sapna8manglik@gmail.com

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