सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की 5 कविताएं

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव
  1. राजा

एक

उसे वो पसंद हैं
जो मुंह नहीं खोलते
उसे वो पसंद हैं
जो आंखें बंद रखते हैं
उसे वो पसंद हैं
जो सवाल नहीं करते
उसे वो पसंद हैं
जिनका खून नहीं खौलता
उसे वो पसंद हैं
जो अन्याय का प्रतिकार नहीं करते
उसे मुर्दे पसंद हैं
वो राजा है

राजा

दो

भूख कहा

राजा ने सपने उछाल दिए

घर कहा

राजा ने सपने उछाल दिए

नदी कहा

जंगल कहा

बारिश कहा

वो सपने उछालता गया

हर तरफ

सपने ही सपने तैर रहे हैं

सपनों से प्रदूषित हो गई है हवा

जहरीला हो गया है पानी

मर रही हैं नदियां

सूख कर जल रहे हैं जंगल

आग में हाथ ताप रहा है राजा।

3. अब हर हत्या हत्या नहीं

बदल रही है

हत्या की परिभाषा

हत्यारे की भी।

हत्या

अब हत्या हो भी सकती है

नहीं भी हो सकती है।

हत्यारा

अब हत्यारा भी हो सकता है

या फिर हो सकता है

हिन्दू या मुसलमान।

बोल सकने वाली जीभें

स्वाद को समर्पित हो चुकी हैं

और वो बड़ी कामयाबी के साथ

बदल रहे हैं

हत्या और हत्यारे की परिभाषा

4. वायरल भूख

दुनिया में हर चीज वायरल हो रही है

मतलब कम हो रही है दुनिया की  प्रतिरोधक क्षमता

इतनी कम कि बुरी से बुरी चीजें भी भाने लगी है उसे

जिन चीजों को देख घिन आनी चाहिए

वही आजकल वायरल हो रही है।

लेकिन मैं हैरान हो जाता हूं

कि जिस शैतान ने दुनिया को सबसे ज्यादा तबाह किया

वो वायरल क्यों नहीं होता

जी हां

मैं भूख की  ही बात कर रहा हूं

जिस पर सबसे ज्यादा बात होनी चाहिए थी

उसी पर सबसे ज्यादा चुप्पी है

ना अखबार कुछ लिखते हैं

ना टेलीविजन कुछ दिखाता है

सोशल मीडिया पर तो बिल्कुल खामोशी है

लेकिन अब और नहीं

गरीबों की भूख को दबा कर रखने की साजिश और नहीं

मैं शब्दों का एक ऐसा सॉफ्टवेयर बना रहा हूं

जो भूख को वायरल बना देगा

हर खाए-अघाए लोगों तक पहुंचेगी ये वायरल भूख

उन्हें भूख की तकलीफ का कराएगी एहसास

बताएगी कि कोई बच्चा भूख से चीखता क्यों हैं

कि गरीबों के पेट में  किस तरह कटार बन कर चुभती है भूख

कि कैसे वो मृत चेहरे  क्रीम पॉवडर पोत कर खड़े हो जाते है सड़क के किनारे

कि जिसे आप जिस्म बेचने वाली लड़की समझते हैं, दरअसल वो भूख होती है

कि कैसे एक मां ही अपने कलेजे के टुकड़े को कुछ नोटों के लिए बेच देती है

कि जिसे आप निर्दयी मां समझते हैं, दरअसल वो भूख ही होती है

कि कैसे रोटी के लिए चांद को निहारते बच्चे पर आसमान से गिरता है बम

कि किस तरह मलबे के नीचे जिंदगी के लिए तडपती है लहूलुहान भूख

दोस्तो, यही सही वक्त है

भूख से उनका तार्रूफ कराने का

जिनका पेट हमेशा भरा रहता है।

5. ईश्वर और किसान

बिचौलियों से परेशान है ईश्वर

किसान भी

दोनों का हिस्सा

मार लेते हैं बिचौलिए

ईश्वर नहीं करता  विरोध

इसलिए उसके हिस्से फूलों की माला

किसान विरोध करता है

उसके हिस्से फन्दा

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