सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की पांच कविताएं

0109-rotiyon-ke-hadse-page-001

सिस्टम
रास्ता रोका है मज़दूरों ने
क्योंकि उन्हें
रोटी की जरूरत है

पुलिस ने बरसाए हैं डंडे
क्योंकि भूख उन्हें भी  लगती है

भूख दीवानी है
मैंने ठंडे चूल्हे में
मुहब्बत को दम
तोड़ते देखा है

भूख दीवानी है
किसी को नहीं छोड़ती

दूसरा पहलू
पहली बार  उसे डर लगा
रोटी को देखकर
उसे विश्वास ही नहीं हुआ
इतनी डरावनी भी
हो सकती है रोटी

उसे लगा
व्यर्थ हो गई
हर मेहनतकश के लिए
उसकी रोटी की लड़ाई

उसके सामने पड़ी
खून से सनी रोटी पर
भिनभिना  रही थीं मक्खियां
मानो हंस रही थीं
उसकी विफलता पर

वह कांप  उठा
नहीं!
अब वह सिर्फ
रोटी के लिए
नहीं लड़ेगा
बल्कि
ढूंढेगा उन हाथों को भी
जो रोटी को
रक्तरंजित कर  रहे हैं।

आक्रोश
कुत्तों में आक्रोश है
आदमी के प्रति
क्योंकि
आदमी ने
दुम हिलाने  के
मौलिक अधिकार से
वंचित कर दिया है उन्हें।

अभाव
अभाव का ज़हर
भर रहा है
खून में आग
डर है व्यवस्था के
खाक हो जाने का

ये कविताएं सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के सद्यप्रकाशित कविता संग्रह  ‘रोटियों के हादसे’ से ली गई है। अगर आप ये किताब पढ़ना चाहते हैं तो अमेजन पर उपलब्ध है। नीचे के लिंक पर क्लिक कर इस पुस्तक  को खरीद सकते हैं।

http://www.amazon.in/Rotiyon-Hadse-Satyendra-Prasad-Srivastava/dp/9352659694/ref=sr_1_1?s=books&ie=UTF8&qid=1473566606&sr=1-1&keywords=rotiyon+ke+hadse

 

Save

You may also like...

7 Responses

  1. Sling TV says:

    This article will assist the internet viewers for building up new web site
    or even a blog from start to end.

  2. अनवर सुहैल says:

    रोटियों के बहाने आज के हालात और इंसानों की बेचारगी को बयान करती कविताएँ ।

  3. Sushma sinha says:

    बेहतरीन कविताएँ !!!

  1. April 6, 2019

    Google

    Here are a number of the sites we advise for our visitors.

  2. April 19, 2019

    Sex Toys

    […]we came across a cool web site that you just may love. Take a look for those who want[…]

  3. April 19, 2019

    Store

    […]Sites of interest we have a link to[…]

  4. April 20, 2019

    butt plug review

    […]one of our visitors not long ago suggested the following website[…]

Leave a Reply