शुक्ला चौधुरी की चार कविताएं

जन्म

पूस का महीना
तभी तो कहूं
इस महीने से
इतनी खुशबू
क्यों आती है
मेरी मां की–

पूस

वह एक भारी
और भरा हुआ महीना था
लबालब जैसे
हवा ठन्ड,फूल और पानी
कुछ भी खाली नहीं

आधा चाँद–
आकाश–
शान्त

युद्धरत थी
बस मेरी मां

मैं शोक नहीं मनाती

मां-पापा
मैं भूली नहीं हूं–पर
शोक भी नहीं मनाती तुम्हारा —
क्योंकि/छूटे हुए है बहुत सारे सामान
तुम दोनों के मेरे पास
मैं शोक नहीं मनाती
मैं उन मासूम यादों को
उतारती और तह करती हूं–
रोज खाली वक्त में–

मां
—–जब मैं
तुम्हें गोद में लेकर
लोरी गा रही थी
मेरा नाम दर्ज हो रहा था
कवयित्री की लिस्ट में
जब मैं तुम्हें न खत्म
होने वाली–
कहानी पर कहानी
सुनाती थी तब मैं
कथाकार –और जब
तुम्हें चुप कराने के लिए
गोल-गोल घूमती थी पृथ्वी की थाल पर
तो नृत्यांगना

अथाह संभावना से परिपूर्ण माँ
३६५ नं के डिब्बे में उदास क्यों बैठी है

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1 Response

  1. om sapra says:

    MANYAVAR-
    NAMSATEY
    SHUKLA CHAUDHURY KI KAVITAYEN KAFI SASHAKAT AUR
    PRABHAVSHALI LAGI-
    SAVEDNA KE STAR PAR ”MAAN” AUR
    ” MEIN SHOK NAHI MANATI”
    DONO KAFI ACCHI LAGI-
    BADHAI–
    REGDS
    –OM SAPRA
    DELHI–
    M- 981818 0932

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