सुधा चौरसिया की तीन कविताएं

बलात्कारियों के नाम!

इस साल
तुम मेरी चीखों के नाम
एक
प्रेम पत्र लिखो

लिखो कि
हवा
तुम्हारे बिना जहरीली है
फूल तुम्हारे बिना
सौंदर्यहीन है

इस साल
तुम मेरी चीखों के नाम
एक
प्रेम पत्र लिखो

लिखो कि
धरती की हरियाली
तुम्हारे बिना
नीरस है
आकाश की नीलिमा
तुम्हारे बिना
अर्थहीन है

इस साल
तुम मेरी चीखों के नाम
एक
प्रेम पत्र लिखो

कविताएं
तुम्हारे बिना
शब्दों के जाल हैँ
तूलिका
तुम्हारे बिना बेजान है

लिखो कि
रंगों की बस्ती
तुम्हारे बिना बेजुबान है

इस साल
तुम मेरी चीखों के नाम
एक
प्रेम पत्र लिखो

साजिश!

पहले तुम्हें
अमानुष बनाया
फिर तुम्हारे ही
हाथों से
अपनी सारी
सुख-सुविधाओं की
सामग्री बनवाई
और सभी को
अधिकृत कर लिया
सामंतवादी प्रवृति वाले
मनुष्यों ने
पर, जब तुमसे
भगवान बनवाया
उदारता पूर्वक
तुम्हारे हाथों में
थमा दिया
ताकि
पीढ़ी दर पीढ़ी
उस साजिश रूपी
भगवान के आगे
अपने सुख के लिए
गिड़गिड़ाते रहो
और अपनी
दयनीय स्थिति को
अपनी नियति समझ
चुपचाप जीते रहो

गौ माता!

गौ को
माता मानते हो
उनके शरीर में
तैंतीस करोड़ देवताओं के
वास करने की बात कहते हो
पर, बूढ़ी होने पर
इन तथाकथित माताओं को
कसाइयों के हाथ बेचते हो
और उनकी खाल से बने
चप्पल-जूते से
सुसज्जित हो
अपने व्यक्तित्व को निखार कर
गौरव महसूस करते हो
बेचारे तैंतीस करोड़ देवगण
तुम्हारे पैरों के नीचे
कचमचाते रहते हैं
——
परिचय
नाम-   सुधा चौरसिया
जन्म- 15 जुलाई 1957
जन्म स्थान- अलीगंज,
जिला-बांका ( बिहार )

पिता- स्व० रामाशीष मोदी
शिक्षा- एम०ए०(हिंदी)
रचनाएँ- विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं         में कविताएं प्रकाशित।
पुरस्कार/सम्मान- भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘ डॉ0 अम्बेडकर
फ़ेलोशिप” एवं अखिल भारतीय साहित्यकार समिति द्वारा “महादेवी वर्मा
सम्मान”।
कार्य- स्वतंत्र लेखन।
पता- w/o स्व० डा०उमेश चन्द्र चौरसिया
(अधिवक्ता)
मुहल्ला- मुंगरौड़ा(गढ़ावा स्कूल)
पोस्ट- जमालपुर(पिन-811214)
जिला- मुंगेर(बिहार)

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