दशरथ की कहानी

सुनील मिश्रा

SUNIL MISHRA

कमाकर अपना व परिवार का पेट भर लेना, ये सपना भले ही देखने-सुनने में बड़ा छोटा लगता हो, मगर बहुत सारे लोगों की आँखों में तैरता ये सपना उन्हें अपने घरों से दूर बहुत दूर ले जाता है, पिछले दिनों नोएडा में ऐसे ही एक मुस्कराते हुए शख्स से मुलाक़ात हो गई। पटना के किसी गाँव से आया ये नौजवान इस शहर में रिक्शा चला, बहुतों को रोज उनकी मंजिल तक पहुंचाता है। नाम है दशरथ, पता है, नोएडा के फुटपाथ पर झुग्गी।

बात-बात में दशरथ ने इस शहर में आने का अपना जो प्रयोजन बताया, दरअसल वो उसका बड़ा सपना है। वो अपने बच्चों को पढ़ा, उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर बनाना चाहता है। और इसलिए दशरथ ने अपने गाँव की माटी और परिवार से खुद को दूर कर लिया है। मैंने यूँ ही पूछ लिया, ”कितनी कमाई हो जाती है।”

वो मुस्कराया। बोला.” यही कोई तीन-चार सौ।”

मैंने पूछा, ” बस, इतनी कम कमाई से अपने सपने कैसे पूरे कर पाओगे?

वो थोड़ा और जोर से हंसा, बोला, ”ये रिक्शा मेरा अपना है। मैं औरों की तरह कोई नशा नहीं करता। मेरा सपना दूसरों की मंजिल से होकर गुजरता है और मैं रिक्शा खाली हो, तो मैं किसी को जाने से मना भी नहीं करता। किसी के पास पैसे कम हो तो भी चलेगा। मजबूर हो, तो भी अपना रथ इस रास्ते पर दौड़ता रहता है, साहेब लोग मुझे दुआएं तो देता ही होगा न बाबूजी?”

वो भोला-भाला किसी मासूम की तरह मुस्कराता हुआ अपनी बात कहे जा रहा था, मैं हैरत से उसकी जिंदादिली को शब्द देने की कोशिश में जूझ रहा था, तब तक मेरी भी मंजिल आ गई।

मैं रिक्शे से उतरा, जब मैंने उसके हाथों में पैसे रखे, सच कहूँ उसके हांथों के ढठ्ठे देख, मेरे हाँथ काँप गए,

जाने क्या हुआ अचानक ही उसके हाथों को मैंने चूम लिया, पूरे सफर मुस्करा रहा दशरथ भरभरा कर रो पड़ा। वो रिक्शा घूमा तेजी से चल दिया, मैं एकटक भावशून्य उसे यूँ ही जाता हुआ देखता रहा, टर्न लेते हुए पलटा था, उसने हवा में अपना हाथ हिलाते हुए, मानो कह रहा हो, फिर कभी मिलेंगे, अचानक मेरी नजरों से गुम हो गया, पगला कहीं का इतनी गर्मी में अपने सपनों की मंजिल तलाशने को, किस-किस को उनकी मंजिल तक पहुंचाता फिर रहा होगा … दशरथ। खुद के सपनों की मंजिल का सफर कब तक अपने हाँथ-पांवों के सहारे पूरा करता रहेगा, मुझे नहीं मालूम, फिर भी मुझे उम्मीद है, उसके हौसलों पर, उसके सपने पूरे होंगे, न जाने क्यूँ .. उससे मेरा एक अंजाना रिश्ता है … !!!

You may also like...

Leave a Reply