सुप्रिया सिन्हा की दो कविताएं

 माँ     मुझे    आने    तो  दे

माँ   मैं  एक   कली   हूँ
फूल  बनकर अपनी ‘खुशबू’
बिखेरने   तो   दे,,,,,,
माँ,, मैं  एक  नन्हीं सी पंछी हूँ
खुली  सृष्टि में अपने स्वप्नों का
पंख  फैलाने  तो  दे ।
माँ  मुझे आने तो दे ।
मैं ही बहन,, मैं ही बेटी
हर रूप में  मैं  जीती
शाश्वत,, निराकार,,,
फिर  जन्म से पहले
मेरी हत्या की क्यों
रची जा रही साजिश?
माँ, मैं एक बंद सीप हूँ
अपनी ममता के घने साए में
सही आकार लेने तो दे,,,
माँ  मैं  तेरी  अंश हूँ
मुझे भी अपने हिस्से का
प्यार  पाने  तो   दे,,,,,
माँ  मुझे आने तो  दे ।

माँ मैं तेरे वजूद की निशानी हूँ
मुझे भी अपना हक़
पाने  तो   दे,,,,
माँ मुझे आने तो दे ।
माँ तू खामोश क्यूँ है ?
क्यूँ ? मेरे प्रश्न पर मौन है
दुनिया के ज़र्रे – ज़र्रे से कह दे
मैं  लड़की मात्र नहीं
मैं सृष्टिधात्री नारी हूँ ।
फिर मेरे आने से पहले
ये कैसा  मातम  माँ,,,
माँ मैं तो समृद्ध, सृजन की प्रारूप हूँ
माँ  मैं ही साहस, मैं ही सौंदर्य
मैं दहलीज की गरिमा, और
मैं ही दुर्गा रूप चण्डी की प्रतिमा
दुनिया को समझाने तो दे
माँ  मुझे आने  तो  दे ।


हौसला  मत  हार

कौन   कहता   है   …….
नारी तू कमजोर है
जरा !  एक  कदम
दहलीज के बाहर
रखकर तो  देख  ।
यूँ   न  खुद   को
छिपाकर रख
चिलमन के घेरे में,,,
जरा ! एक बार अपने
चेहरे से  अबला का
पर्दा  हटाकर तो देख ।
यूँ  न  खुद को सजा दे
लाज़  औ  शर्म  की
सिमटी कोरी चुनरिया में
जरा ! एक बार अपने
बुलंद हौसले का परचम
लहरा कर तो देख  ।
यूँ  न  खुद को तबाह कर
रस्मों – रिवाज  की
जकड़ी अंधी  बेड़ियों में,,,,
जरा ! एक बार  उन्मुक्त पंछी बन
अपने  स्वप्नों  का  पंख
फैला  कर  तो  देख ।
देखे   हैं  जहाँ  ने
तेरे हुस्न  के हज़ारों ज़लवे
जरा ! अपने चण्डी  रूप
का  दर्शन कराकर तो देख ।
सजाई है, हमेशा से तूने
अपनी कलाइयों पर
मेहंदी   और   चूड़ियाँ,,,,,
इन्हीं कोमल कलाइयों से
जुल्म  का प्रतिकार
कर  के तो  देख  ।
मिल जाएगी मंजिल,,
ज़रा ! एक बार अपने
अंध – उर   में
करो या मरो का चिराग
जलाकर  तो   देख   ।

 


नाम  – सुप्रिया सिन्हा
जन्म  स्थान –  भीखनपुर,, शाहकुण्ड,, जिला – भागलपुर
       (बिहार)
शिक्षा – B. A ,P. G     Diploma in mass                          
Communication from IIMMI,, new Delhi,,
M. A in Hindi from vinayka mission uni.
B. Ed from Dr C. V Raman b. Ed college..
वर्तमान – पता   – इलेक्ट्रॉनिक   सिटी,, बेंगलुरू
प्रकाशित रचनाएँ – समाचार – पत्रों  में आलेख का
प्रकाशन

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1 Response

  1. Paritosh kumar piyush says:

    अच्छा प्रयास….
    शुभकामनाएं।

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