सुशांत सुप्रिय की 5 कविताएं

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2 Responses

  1. Sushma sinha says:

    बहुत बढ़िया कविताएँ !!

  2. कुमार विजय गुप्त , munger says:

    हालाँकि पिता की छवि के पीछे से
    कभी-कभी उनके बचपन का चेहरा भी
    झाँकने लगता है इस ओर……….

    और

    समुद्र मेरे भीतर ही था
    एक दिन मेरे मन की मछली
    खुली खिडकी से गहराई में उतर गई…. जैसी लाजवाब पंक्तियों के कवि सुशांत सुप्रिय जी को बधाई !

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