गर्म राख में सुबकती ग़ज़लों में आक्रोश का तेवर

अदम गोंडवी की ग़ज़ल- पुस्तक “समय से मुठभेड़” की समीक्षा दीप नारायण ठाकुर जब कोई पाठक किसी रचना को पढ़ता है और यह महसूस करता है कि यह तो उसके आसपास की है , उसकी ज़िंदगी से , लोगों की ज़िंदगियों से जुड़ी हुई है तो समझना चाहिए कि रचनाकार...