Tagged: कहानी

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रमेश शर्मा की कहानी ‘एक मरती हुई आवाज़’

जाते दिसंबर का महीना था. हफ्ते भर पहले पछुआ हवाओं से हुई बारिश के चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही थी. जगमगाते शहर को देखकर लगता था कि क्रिसमस की तैयारियां अब जोरों पर हैं. शहर के अधिकांश घर रंगीन झालरों की रोशनी में अभी से डूबे हुए थे. उसने...

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अच्छे और बुरे आदमी के बीच की ‘बारीक रेखा’ की कहानी

प्रज्ञा की कहानी ‘बुरा आदमी’ पर सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की टिप्पणी कबीर कह गए हैं, बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय हर भले आदमी के भीतर एक बुरा आदमी छिपा होता है। वह कब फन उठाएगा कोई नहीं जानता।...

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नीरजा हेमेंद्र की कहानी ‘लड़की की जात’

—————————- नीरजा हेमेन्द्र जन्म-पडरौना, ( कुशीनगर ) उ0 प्र0। शिक्षा- एम.ए.( हिन्दी साहित्य ), बी.एड.। संप्रति- शिक्षिका ( लखनऊ उ0 प्र0 ) प्रकाशन-  5 कहानी संग्रह अमलतास के फूल, जी हां, मैं लेखिका हूं, पत्तों पर ठहरी ओस की बूंदें, और एक  दिन, माटी में उगते शब्द 2 उपन्यास अपने...

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कमलेश की कहानी ‘ज़मीन’

पूस की एकदम ठंडी रात। काली-कलूटी और डरावनी। उस पर रात के दो बजे। अपने घर के बरामदे में निकलो तो डर लगे। सर्द हवा जैसे हड्डियों तक में घुस जाने के लिए बेताब हो। रजाई या कंबल से निकलना तो मानो सजा की तरह लग रहा है। इसमें रह-रह...

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समाज में बढ़ती सांप्रदायिकता से मुठभेड़ करतीं कहानियां

‘पहल 122′ में प्रकाशित गौरीनाथ की कहानी ‘हिन्दू’ और हरियश राय की कहानी ‘महफिल’ पर एक टिप्पणी सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ‘पहल जून-जुलाई 2020’ में प्रकाशित गौरीनाथ की कहानी ‘हिन्दू’  न केवल इस अंक की उपलपब्धि है बल्कि मौजूदा समय को बड़े प्रभावी ढंग से रेखांकित करती एक महत्वपूर्ण कहानी है।...

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राजा सिंह की कहानी ‘असफल’

राजा सिंह द्वारा राजाराम सिंह पताः- एम0 1285, सेक्टर-आई एल.डी.ए. कालोनी    कानपुर रोड, लखनऊ-226012                    मोबाइल 9415200724 वह लम्बे-लम्बे डग भरता है।उसे मालूम है कि मॉर्निंग वॉक के समय जोर-जोर से चलना चाहिए। धीमे टहलने से कोई फायदा नहीं। परन्तु तेज कदमों से चलने से वह थक जाता है,  हांफने...

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ईश मिश्र की कहानी ‘गुलेरी जी की आत्मा’

ईश मिश्र दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से राजनीति शास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर पद से फरवरी 2019 में रिटायर। 1985 से पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं शोधपत्र लिख रहे हैं। सांप्रदायिकता पर लेखों का संकलन प्रकाशनार्थ समयांतर (मार्च 2017-नवंबर 2017) में समाजवाद पर प्रकाशित 9 लेखों को संकलित संपादित करने की तैयारी। 17 बी, विश्वविद्यालय मार्ग दिल्ली...

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शिव कुमार यादव की कहानी ‘किन बैरन लगाई ई आग रे…’

शिव कुमार यादव जन्म – 28जुलाई 1960 गांव – कतिकनार,बक्सर, बिहार। रचनाएं – हवा,काले फूल का प्रेम और रामऔतार की भैंस कहानी संग्रह। ईश्वर का हिन्दू और आस्था की परती पर, कविता संग्रह। अंधेर अर्थात बेजान बेजुबान समय की कहानियों का बंग्ला,मरठी, पंजाबी और तेलगु में अनुवाद। संप्रति :- सेल,आई एस...

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विवेक मिश्र की कहानी ‘कारा’

विवेक मिश्र 15 अगस्त 1970 को उत्तर प्रदेश के झांसी शहर में जन्म विज्ञान में स्नातक, दन्त स्वास्थ विज्ञान में विशेष शिक्षा, पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्कोत्तर. तीन कहानी संग्रह- ‘हनियाँ तथा अन्य कहानियाँ’-शिल्पायन, ‘पार उतरना धीरे से’-सामायिक प्रकाशन एवं ‘ऐ गंगा तुम बहती हो क्यूँ?’- किताबघर प्रकाशन तथा उपन्यास...

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शिवदयाल की कहानी ‘नन्हें रंगदार’

शिवदयाल मो.- 9835263930 ‘चोर-चोर ….’ अचानक शोर उठा और इतवारी तरकारी बाजार में धक्कामुक्की और ठेलमठेल शुरू हो गई। मैंने आलू वाले से वापस रेजगारी लेने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि बगल से किसी ने धक्का मारा। मैं आलू के ढेर पर गिरते-गिरते बचा, लेकिन धक्के के जोर...

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विजय शंकर विकुज की कहानी ‘संक्रमण’

विजय शंकर विकुज जन्म 12 सितंबर 1957, आसनसोल शिक्षा – स्नातक प्रकाशन – वागर्थ, वर्तमान साहित्य,  कतार,  संवेद,  निष्कर्ष,  मधुमती,  कथाबिम्ब,  प्रेरणा,  जनसत्ता, छपते छपते, उत्तर प्रदेश, भाषा, युद्धरत आम आदमी,  वैचारिकी,  स्वाधीनता,  सृजनपथ, समय के साखी इत्यादि पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित। कहानी के अलावा आलेख, संस्मरण, रिपोतार्ज, साक्षात्कार तथा अन्य कई विधाओं में लेखन। बहुत – सी रचनाओं...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कहानी ‘प्रीमियम’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव शिक्षा : बीएससी (फिजिक्स ऑनर्स), एम ए (हिन्दी), एम ए (पत्रकारिता, गोल्ड मेडलिस्ट) सारी पढ़ाई कलकत्ता  विश्वविद्यालय से पेशा : 3 दशकों से पत्रकारिता। कोलकाता के दैनिक अखबार ‘सन्मार्ग’ से 1990 में नौकरी की शुरुआत। दस सालों तक सन्मार्ग में रहने के बाद टेलीविजन पत्रकारिता में। 2001...

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सुधांशु गुप्त की कहानी ‘सामान के बीच रखा पियानो’

दोपहर के चार…साढ़े चार या पांच बजे हैं। अक्तूबर का महीना है। 8….9 या 10 तारीख। उसने अपने घर में प्रवेश किया है। घर में व्हाइट वाश और पेंट का काम चल रहा है। बड़ा बेटा अभी काॅलेज से नहीं आया है और छोटा बेटा स्कूल से आकर ट्यूशन जा...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘हे राम!’

15 अगस्त का दिन था । सरोजिनी नगर की एक सरकारी कॉलोनी में एक ऊँघते हुए बुधवार की सुबह अलसाई पड़ी थी । बाहर लॉन में कुछ ऐंठे हुए पेड़ खड़े थे जिन पर बैठे हुए कौए शायद स्वाधीनता-संग्राम की कोई कथा सुन-सुना रहे थे । कॉलोनी के गेट के...