आदमी की दुनिया को विस्तार देतीं अनिरुद्ध सिन्हा की ग़ज़लें

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम समकालीन हिंदी साहित्य में ग़ज़ल का प्रभाव बढ़ा है, क़द बढ़ा है, स्वीकृति का दायरा बढ़ा है।