राजेश”ललित”शर्मा की दो कविताएं

समय समय ज़रा सरक बैठने दे मुझे अपने साथ गुज़ारने दे चंद पल कुछ करें बात चलें कुछ क़दम समझें हम तुम्हें तुम हमें समझो सच में बहुत तेज़ चलते हो रुको तो सुनो तो फिर निकल गये आगे चलो मैं ही दम भरता हूँ ज़िंदगी ही से सवाल करता...