Tagged: बाल साहित्य

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बच्चों को पुस्तकें उपहार में दी जानी चाहिए : दिविक रमेश

20वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता–संग्रह ‘रास्ते के बीच’ से चर्चित हो जाने वाले सुप्रतिष्ठित कवि दिविक रमेश को 38 वर्ष की आयु में ही ‘रास्ते के बीच ’ और  ‘खुली आँखों में आकाश’ जैसी साहित्यिक कृतियों पर सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड मिला। दिविक रमेश ने...

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वीणा भाटिया की दो बाल कविताएं

रसगुल्ले के पैसे लाओ   चिड़ियों ने बाजार लगाया कौआ चौकीदार बिठाया। मेले में जब भालू आया उठा एक रसगुल्ला खाया। गौरैया यह कह मुस्काई कहां चल दिए भालू भाई। जल्दी क्या है रुक भी जाओ रसगुल्ले के पैसे लाओ। भालू बोला क्या फरमाया मुझको क्या जान न पाया। मंत्री...