नकुल गौतम की लघुकथा ‘तिरपाल’

मुम्बई में बारिशें इस बार जल्द शुरू हो गयी थीं। पूरी बस्ती रंग बिरंगी तिरपालों से ढंकी जा चुकी थी। बुधिया की छत पहली बारिश में ही साथ छोड़ गयी और घर में यहाँ वहाँ पानी टपकने लगा। बीवी साल भर कहती रही कि छत पर डाम्बर लगवा लो, पर...