गौतम कुमार सागर की लघुकथा ‘एक ब्रेक’

“पिछले चार महीने से एक दिन की छुट्टी नहीं. लास्ट क्वॉर्टर का प्रेसर. जिंदगी एक कुत्ता दौड़ बन गयी है. कभी फायरिंग , कभी वॉर्निंग , कभी इन्सेंटिव का लालच , कभी प्रमोशन का इंद्र धनुषी छलावा. ओह ! दिमाग़ फट जाएगा.”- हितेश अपनी नव विवाहित पत्नी रम्या से बड़ी...