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क़ैस जौनपुरी की कविता ‘वो चड्ढी पहना हुआ आदमी’

सुबह का सूरज पीली धूप चाय की दुकान भूख लगी है, चाय पिला दो!   नज़र उठाके सबने देखा चड्ढी पहना हुआ एक आदमी सामने खड़ा था सिर्फ़ चड्ढी और धूल-मिट्टी से सना हुआ पता नहीं कहाँ से आया था? और पता नहीं कहाँ को जाएगा?   भूख लगी है,...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘कबीरदास’

यह काल्पनिक कहानी नहीं है , सच्ची घटना है । पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने मामा के यहाँ रहने के लिए आया । वहीं मामाजी ने मुझे यह सत्य-कथा सुनाई । पिछले कई सालों से शहर के इलाक़े रामपुरा शरीफ़ में एक अर्द्ध-विक्षिप्त बूढ़ा भटकता हुआ दिख...

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महावीर राजी की कहानी ‘पंच’

रेलवे स्टेशन के गर्भ से नाल की तरह निकल कर ऐश्वर्या राय की कमर की तरह छुई मुई सी “स्टेशन सरणी ” शहर के बीचों बीच से गुजरने वाले अजगरनुमा ‘शेर शाह सूरी मार्ग ‘ को जिस स्थान पर लम्बवत क्रॉस करती आगे बढ़ जाती है, वह जगह शहर के...

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हंस राज की लघु कथा ‘दान’

आज मैं बहुत जल्दी में था।  दफ्तर के लिए घर से निकलते-निकलते देर हो गई थी।  सोचा पैदल मेट्रो स्टेशन तक जाऊंगा तो और देर हो जाएगी। अतः रिक्शा ले लिया।  रिक्शेवाला लोहे के छर्रे पर अपनी बूढी हड्डियों के सहारे रिक्शा को खींचता स्टेशन की तरफ चल पड़ा।  स्टेशन...

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तीन युवा कवि, तीन कविताएं

मैंने सहेजा है तुम्हें गौरव भारती मैंने सहेजा है तुम्हें ज्यों पत्तियां सहेजती हैं धूप माटी सहेजती है बारिश फूल सहेजता है खुशबू चाँद सहेजता है चांदनी ज्यों माँ सहेजती है बच्चों के लिबास संग लिपटी यादें मैंने सहेजा है तुम्हें जैसे बचपन की बदमाशियां नानी की कहानियां माँ के...

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अभिज्ञात की पांच कविताएं

खुशी ठहरती है कितनी देर मैं दरअसल खुश होना चाहता हूं मैं तमाम रात और दिन सुबह और शाम इसी कोशिश में लगा रहा ता-उम्र कि मैं हो जाऊं खुश जिसके बारे में मैं कुछ नहीं जानता नहीं जानता कि ठीक किस ..किस बिन्दु पर पहुंचना होता है आदमी का...

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सेवा सदन प्रसाद की तीन लघुकथाएं

गुमशुदा इंसान एक आदमी पागल की तरह सड़क पर दौड़ रहा था। ट्राफिक पुलिस ने डपट कर कहा — “अरे! पागल है क्या ? बार – बार सड़क पे दौड़ रहा है – – क्या ढूंढ रहा है  ?।” ” इंसान ढूंढ रहा हूं ” पागल ने याचना भरे शब्दों...

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मामाजी

रागिनी पुरी करीब छह बज रहे हैं। पूरा घर सुबह की पहली अंगड़ाई ले रहा है। सुमेधा के कानों में हल्की हल्की आवाज़ें छन कर आ रही हैं। कभी बाथरूम की हल्की फुल्की उथल पुथल, तो कभी रसोई में बर्तनों के खड़कने की आवाज़ें…इसका मतलब मामीजी जाग गई हैं। लॉबी...