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मार्टिन जॉन की पांच कविताएं

 बची रहे चिड़िया    चख रही है चिड़िया खिला रही है बच्चों को पेड़ के पके –अधपके फल तृप्ति का मधुर गीत गाते हुए अपनी हरी –भरी बाहों से संभाले फलों की टोकरी गुनगुना रहा है पेड़  क़ुर्बानी वाली कविता मौन रहकर सबकुछ लुटा देने का ज़ज्बा दिखाते हुए |  ...

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रंजीत राज की तीन कविताएं

दर्द से रिश्ते दर्द से रिश्ते कुछ ऐसे बने मेरे कुछ टूट गये कोरे सपने मेरे यही तो मेरी जमा-पूँजी है खाली आसमाँ खाली-खाली जमीं है दर्द सहना है चुप ही रहना है मैं कवि हूँ जब तक जीना है पल-पल मरना है पीड़ाओं का मुकुट किसे दिखलाऊँ समंदर दुविधाओं...