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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की पांच कविताएं

सिस्टम रास्ता रोका है मज़दूरों ने क्योंकि उन्हें रोटी की जरूरत है पुलिस ने बरसाए हैं डंडे क्योंकि भूख उन्हें भी  लगती है भूख दीवानी है मैंने ठंडे चूल्हे में मुहब्बत को दम तोड़ते देखा है भूख दीवानी है किसी को नहीं छोड़ती दूसरा पहलू पहली बार  उसे डर लगा...

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राज्यवर्द्धन की नौ कविताएं

कागज की कश्ती कागज की नाव बचपन की अब भी तैर रही है पानी में फर्क सिर्फ इतना है कि उसमें मैं नहीं मेरे बच्चे सवार हैं इसलिए मैं किसी से कागज की कश्ती लौटाने की जिद नहीं करता प्रतीक्षा किसी सुबह आप उठते हैं और बारिश की गंध महसूस...