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श्रीराजेश की दो कविताएं

श्रीराजेश देखो कामरेड देखो कामरेड , देखो सर्दी की ठिठुरन की मार के निशान उसके रक्ताभ चेहरे पर किस कदर दिख रही है   अब वह बड़े मालिक को बेड टी देने लायक नहीं रहा उसकी धमनियों में बहता खून लंबे-चौड़े भाषण सुनते-सुनते फ्रिज हो गया हैं   अब हाथों...

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हाशिये पर

उदयराज   ”हैलो, कौन?” ”हैलो, मैं श्यामल बोलता। तुम्हारे पीछे से।” ”अरे, श्यामल दा। तुमने इस नाशुक्रे को कैसे याद किया?” ”नहीं दीपक, तुम ऐसा मत बोलो। वो हमारा मिस्टेक था।” ”नहीं, श्यामल दा, कुछ तो सच, अ बिट ट्रूथ तो रहा ही होगा न।” ”हम तुम्हारा बात आज भी...