Tagged: diary

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बुढ़ापे में पत्नी और पैसा ही काम आते हैं

  जयप्रकाश मानस किस्त : 11 8 सितम्बर, 2015 कौन हिंदुस्तानी, कौन पाकिस्तानी 1965 के युद्ध के बाद रेडियो पाकिस्तान से फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़लें बजनी बंद हो गईं थीं, पता चला कि अब किसी भी हिंदुस्तानी शायर का कलाम नहीं बजेगा। किसी ने रेडियो पाकिस्तान, कराची की दीवार पर...

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महान होने का मतलब

  जयप्रकाश मानस किस्त -दस 3 सितम्बर, 2015 फूले कास सकल मही छाई रायपुर और नया रायपुर के बीच 30-35 किलोमीटर का फ़ासला है । दोनों तरफ़  हरे-भरे खेत, घास या फूलों की क्यारियाँ । आज मंत्रालय जाते वक्त एकाएक दिख पड़े कास के सफेद फूल । बरबस याद आ...

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अभी तो दुनिया में अन्धेर है

  जयप्रकाश मानस एक कवि की डायरी : किस्त 7 29 अगस्त, 2015 अभी तो दुनिया में अन्धेर है दिन कब का ढल चुका है, जबकि मेरे भीतर हेमंत दा का स्वर गूँज रहा है, प्रदीप का यह अमर गीत, लक्ष्मीकांत – प्यारेलाल का लाजबाब संगीत के साथ, जो मेरे...

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भगवान हो सकता है कलेक्टर

  जयप्रकाश मानस www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी : किस्त 6 25 अगस्त, 2015 एक कली दो पत्तियाँ फाइल में उलझे-उलझे बरबस याद आ गये महान संगीतकार भूपेन दा और उनका यह सुमधुर गीत – मन है कि भीतर-ही-भीतर...

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शहर काइयांपन सिखाता है

जयप्रकाश मानस www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी किस्त : 5 28 नवंबर, 2011 तदर्थ उपाय मलेशिया ने टैक्सी चालकों द्वारा महिलों के साथ बलात्कार और डकैती की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए महिलाओं के लिए महिला चालकों द्वारा...

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परिवर्तन ईमानदार समाज ही कर सकता है

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी : किस्त 4 10 नवंबर, 2011 जानना है बहुत कुछ आ.रंजना अरगड़े (गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद) ने बड़ी आत्मीयता के साथ 23-24 दिसंबर को होने वाले राष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘साहित्य तथा प्रौद्योगिकी...

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एक कवि की डायरी : भाग 3

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha.com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, 18 अक्टूबर, 2011 माँ और घर माँ आज शाम की ट्रेन से गाँव लौट गयी । घर ख़ाली-ख़ाली नज़र आता है । माँ का रहना घर का भरा-पूरा होना होता है । माँ का रहना घर...

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एक कवि की डायरी

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha.com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, छत्तीसगढ़-492001 मो.-94241-82664 23 सितंबर 2009 आम आदमी के पास ऊर्जा नगरी कोरबा में हाहाकार मचा हुआ है । बुरी-ख़बर से मन व्याकुल है । कोरबा, एनटीपीसी, छत्तीसगढ़ के पावर प्लांट में लगी चिमनी के ढह जाने...