Tagged: diwali

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मो. शफ़ीक़ अशरफ की लघुकथा ‘सुबह के पटाखे’

  मो0 शफ़ीक़ अशरफ मोहिउद्दीनपुर, समस्तीपुर (बिहार) टीवी पर संदेश आ रहा था, दिवाली पर पटाखे कम जलाएँ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ ही ध्वनि-प्रदूषण भी, पटाखों की तेज़ आवाज़ से बच्चे-बूढ़े, पशु-पक्षी सब परेशान हो रहे हैं, ऑफिस जाने का समय हो रहा था जल्दी से तैयार...

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कुमार विजय गुप्त की कविता ‘दीपावली की रात तुम’

एक लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद धूपबत्ती की भीनी खुशबू और घंटी की सुरीली आवाज़ के बीच अराधना की मुद्रा में हाथ जोड़े खड़ी तुम दिखती हो एक सुंदर मंदिर -सी और मेरे भीतर जड़ जमाने लगती है आस्तिकता की दूब दो नन्हें नन्हें टिमटिमाते दीपों को करीने से सजाकर छज्जे,...