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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी एक आओ सुनते है एक दूसरे की धड़कनों को धड़कनेंधड़कती हैं जैसेघड़ी की सुईटिक-टिक करती और ले जाती हैं हमेंं उम्र के उस दौर मेंजहाँ न मैं….मैं रहती हूँन तुम….तुम रहते हो हम एक हो जाते हैंउम्मीदों का हरापन लेकर  दो तुम एक पुल होजिस पर सेतमाम रिश्ते गुज़र रहे हैंधड़ाधड़ जैसे गुज़रती...

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

तब भी मैं द्वार जो खुल रहा है प्राचीन का इस द्वार के भीतर असंख्य प्राचीन तोते प्रेम कर रहे हैं अपने प्राचीन तरीक़े से अंतहीन बार प्रेम की सहजता को बचाए आप कहना चाहें तो कह दें मेरे बारे में कि प्रेम को लेकर यह आदमी हमेशा से किसी...