खुद को बदलो, देश को बदलो

  संजय स्वतंत्र किस्त : 10 आज घर की दिनचर्या पूरी करने के बाद जब दफ्तर के लिए चला तो देखा कि बाहर पिताजी गमछा-बनियान में ही खड़े हैं और ठेले वाले से सब्जियां खरीद रहे हैं। एक रिटायर आला अफसर को यों इस अंदाज में देख मैं संकोच में...