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कमलेश भारतीय की दो लघुकथाएं

ईश्वर का जन्म वे टूटे घरों का मलबा या कबाड़ उठाने का काम करते थे । कभी काम मिलता , कभी नहीं । रेहड़ी खडी रहती । खच्चर का चारे का खर्च अलग । ऐसे खाली समय में बैठे सोच रहे थे कि क्या किया जाए । ईश्वर तुम कहां...

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कमलेश भारतीय की चार लघुकथाएं

सहानुभूति वे विकलांगों की सेवा में जुटे थे । इस कारण नगर में उनका नाम था ।मुझे उन्होंने आमंत्रण दिया कि आकर उनका काम देखूं । काम देखकर कुछ शब्द चित्र खींच सकूं । वे मुझे अपनी चमचमाती गाड़ी में ले जा रहे थे । उस दिन विकलांगों के लिए...

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शुक्ला चौधरी की पांच कविताएं

युद्ध और जीवन बहुत पेचीदा मामला है ये युद्ध हुआ युद्ध तो भी मैं सोचूंगी अपने बारे में ही कि किस तरह तुम तक पहुंचू और तुमसे कहूं कि लो मुझे छू कर बैठो शायद- पृथ्वी बच जाए. दुनिया इस फूल पर से गुज़रकर कोई युद्ध नहीं होगा/यहीं फूल को...

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राज्यवर्द्धन की तीन कविताएं

फूल फूल अच्छे लगते हैं लेकिन वे जो निषेचित होकर बनते हैं – फल देते हैं –अन्न सुरक्षित रहता है – बीज भविष्य की यात्रा के लिए कैसे कहूँ उस फूल को सुंदर जो बिना कुछ दिए अभिशप्त होते हैं – झड़ने को । पेड़ जब हम अपनी हवस में...