Tagged: GHAZAL

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अनिरुद्ध सिन्हा की छह ग़ज़लें

  अनिरुद्ध सिन्हा नाम –अनिरुद्ध सिन्हा जन्म -2 मई 1957 शिक्षा –स्नातकोत्तर प्रकाशित कृतियाँ ——————– -(1)नया साल (2)दहेज (कविता-संग्रह ) (3)और वे चुप हो गए (कहानी-संग्रह)  (4)तिनके भी डराते हैं  (5)तपिश  (6)तमाशा (7)तड़प  (8)तो ग़लत क्या है (ग़ज़ल-संग्रह) (9)हिन्दी-ग़ज़ल सौंदर्य और यथार्थ (10)हिन्दी-ग़ज़ल का यथार्थवादी दर्शन(11)उद्भ्रांत की ग़ज़लों का सौंदर्यात्मक...

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गांव पर डी एम मिश्र की पांच ग़ज़लें

  डी एम मिश्र एक नम मिट्टी पत्थर हो जाये ऐसा कभी न हो मेरा गाँव, शहर हो जाये ऐसा कभी न हो। हर इंसान में थोड़ी बहुत तो कमियाँ होती हैं वो बिल्कुल ईश्वर हो जाये ऐसा कभी न हो। बेटा, बाप से आगे हो तो अच्छा लगता है...

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डॉ डी एम मिश्र की पांच ग़ज़लें

डॉ डी एम मिश्र उ0प्र0 के सुलतानपुर जनपद के एक छोटे से गाँव मरखापुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्म । शिक्षा -पीएच डी ,ज्‍योतिषरत्‍न। गाजियाबाद के एक पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में कुछ समय तक अघ्यापन । पुनश्च बैंक में सेवा और वरिष्ठ -प्रबंधक के पद से कार्यमुक्त...

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ग़ज़ल की जरूरत

सुशील कुमार जन्म-13/09/ 1964. पटना सिटी (बिहार) में। सम्प्रति : मानव संसाधन विकास विभाग,रांची (झारखंड) में कार्यरत । संपर्क –  सहायक निदेशक/प्राथमिक शिक्षा निदेशालय/ स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग/एम डी आई भवन(प्रथम तल)/ पोस्ट-धुर्वा/रांची (झारखंड)–834004 ईमेल –sk.dumka@gmail. com मोबाइल न. –09431310216 / 09006740311 प्रकाशित कृतियां– कविता-संग्रह कितनी रात उन घावों को...

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कविता बनाम ग़ज़ल : भाग 2

    सुशील कुमार जन्म-13/09/ 1964. पटना सिटी (बिहार) में। सम्प्रति : मानव संसाधन विकास विभाग,रांची (झारखंड) में कार्यरत । संपर्क –  सहायक निदेशक/प्राथमिक शिक्षा निदेशालय/ स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग/एम डी आई भवन(प्रथम तल)/ पोस्ट-धुर्वा/रांची (झारखंड)–834004 ईमेल –sk.dumka@gmail. com मोबाइल न. –09431310216 / 09006740311 प्रकाशित कृतियां– कविता-संग्रह कितनी रात...

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कविता बनाम ग़ज़ल : भाग एक

    सुशील कुमार जन्म-13/09/ 1964. पटना सिटी (बिहार) में। सम्प्रति : मानव संसाधन विकास विभाग,रांची (झारखंड) में कार्यरत । संपर्क –  सहायक निदेशक/प्राथमिक शिक्षा निदेशालय/ स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग/एम डी आई भवन(प्रथम तल)/ पोस्ट-धुर्वा/रांची (झारखंड)–834004 ईमेल –sk.dumka@gmail. com मोबाइल न. –09431310216 / 09006740311 प्रकाशित कृतियां– कविता-संग्रह कितनी रात...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एक तल्खियां खून की विरासत है छोड़ ना यार ये सियासत है मुफ़लिसी जा रही है महफ़िल में मुफ़लिसी को कफ़न की दावत है हुस्न तेरा मिटा के दम लूंगा सांस तुझसे मेरी बगावत है वाकया ये समझ नहीं आता रात को दिन से क्यों शिकायत है भागता क्यों है...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

टूटे मकाँ में रहता तो गुलदान बुरा है ग़ुरबत में मुहब्बत का भी अंजाम बुरा है भूखा था वो मासूम जिसे चोर कहा तुमने खुद का तेरा भी झांक गिरेबान बुरा है था आसरा मुझको भी बहुत अच्छे दिनों का अच्छा भी सियासत में तो पैगाम बुरा है कोशिश न...

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मनी यादव की चार ग़जलें

एक ख़ुशबू तेरी पयाम लायी है फिर फ़िज़ा में बहार आयी है बेवफ़ा मैं नहीं, न ही तुम हो फ़ितरते इश्क़ बेवफ़ाई है इत्र चुपके से कान में बोला खुशबू दिलदार से चुरायी है कोई मंज़र नहीं रहा ग़म का आज शायद वो मुस्करायी है पहना ज्यों ही लिबास यादों...

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अनिरुद्ध सिन्हा की चार ग़ज़लें

एक जाँ बदन से जुदा  है रहने दे ये जो मुझसे खफ़ा है रहने दे एक न एक रोज़ हादसा है यहाँ अब वहाँ क्या हुआ है रहने  दे छोड़ अब  हुस्न-इश्क़  की बातें ये  फसाना  सुना  है  रहने दे अपनी सूरत से मत डरा मुझको सामने  आईना   है  रहने ...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ की दो भोजपुरी ग़ज़लें

एक आदमिन के ढ़हान, चारू ओर उठि रहल बा मकान चारू ओर एगो बस जी रहल बा नेतवे भर मू  रहल  बा  किसान चारू ओर अब के पोछी हो लोर, ए, दादा रो रहल, समबिधान चारु ओर ई अन्हरिया, बड़ा पुरनिया  हो कब ले  होई  बिहान चारू ओर जे बा...

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अजमेर अंसारी ‘कशिश’ की एक ग़ज़ल

पस्ती में जिसने माना के तदबीर इश्क़ है पहुँचा बुलन्दियों पे तो तक़दीर इश्क़ है ! क्यों देखूँ इस जहान कीं रंगीनियाँ तमाम मेरी नज़र में यार की तस्वीर इश्क़ है हर लम्हा आता–जाता बताता है दोस्तो दुनिया है एक ख़्वाब तो ताबीर इश्क़ है मुझ सा कोई गनी नहीं...

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नूर मुहम्मद नूर की पांच ग़ज़लें

एक क्या पता क्यों खुशी सी होती है ज़िन्दगी ज़िन्दगी सी होती है ऐ अंधेरो! अभी जरा ठहरो मुझमें कुछ रौशनी सी होती है किससे पुछूं, कोई बतलाए क्यों? दोस्ती दुश्मनी सी होती है दिल भी घबरा रहा है हैरत से उसमें कुछ आशिक़ी सी होती है कौन बतालाए शायरी...

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शशांक मिश्रा की एक ग़ज़ल

वो क्या लोग थे साक़ी, क्या अजब मंज़र था। वही मुस्कुरा के मिले जिनके हाथों में खंजर था। राज कितने मुस्कुराते लबों ने छुपा लिए। किसे कब पता था कि आँखों में समंदर था। साक़ी दिखाते भी तो कैसे दिखाते तुझको। घाव जो भी था सीने के अंदर था। नशा-ए-शोहरत...

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मनीष कुमार ‘मुसाफिर’ की एक ग़ज़ल

हरेक दर्द से अब तो गुजर जाना है करके खुद से वादा मुकर जाना है । जानते है कि जख्म जीने नही देंगे दर्दे जिगर में थोड़ा उतर जाना है । जीने के बहाने कब तक ढूंढते फिरे मौत आयेगी और हमें मर जाना है । क्या जानेगा बेदर्द जमाना...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

तेरी यादों का अभी दिल पर असर बाकी है जो करेंगे साथ में तय वो सफ़र बाकी है यूँ तो अश्क़ों से मुकम्मल हो चुका है दरिया फिर भी दरिया में मुहब्बत की लहर बाकी है कुछ तो डर खुद से या मौला से तू आदम तेरा तुझ पर ही...

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अनिरुद्ध सिन्हा की पांच ग़ज़लें

एक राह की  दुश्वारियों  के रुख  बदलकर देखते जिस्म घायल ही सही कुछ दूर चलकर देखते   नींद में ही मोम बनकर ख़्वाब से की गुफ्तगू दोपहर की  धूप में  थोड़ा  पिघलकर  देखते   कुछ तजुर्बों के  लिए  ही दोस्तो इस दौर में देश की मिट्टी कभी  माथे पे मलकर ...

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विशाल मौर्य विशु की तीन ग़ज़लें

एक यार अब  तो ऐसा  आलम  हो गया है मेरा हर इक जख्म मरहम हो गया है कुछ दिनों से वो नज़र आया नहीं के तनहा तनहा सा ये मौसम हो गया है हसते हैं सब, खुश मगर कोई नहीं है आदमी का आँसू हमदम हो गया है ये भी...

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नवनीत शर्मा की पांच ग़ज़लें

एक कुछ मेरा उस पार जिंदा है अभी जब कि ये दीवार जिंदा है अभी मेरी हां मजबूरियों का ढोल है दिल में तो इनकार जि़ंदा है अभी हर तरफ है धुंध नफरत की मगर इस जहां में प्‍यार जिंदा है अभी खुदकुशी कर ली कबीले ने मगर एक अदद...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एक अहले-दिल में कुछ छुपे आज़ार निकले हर शहर में इश्क़ के बीमार निकले कुछ सही पर रोशनी देता तो है जब जुगनुओं का काफिला हर बार निकले यूँ तो क़ातिल मर गया खंजर से उसके गिनने में उतने ही फिर हर बार निकले दास्ताँ सबकी कही तुमने मनी पर...