अर्कित पांडेय की कविता ‘उपहार’

अर्कित पाण्डेयछात्रपता- इकौना बाईपास,जिला- श्रावस्ती मैं रहा रात भर सोचता बस प्रिये,दूँ क्या उपहार में जन्मदिन पर तुम्हें। प्रातः आकाश की लालिमा दूँ तुम्हे,या दूँ पंछियों का चहचहाता वो स्वर,नीले आकाश की नीलिमा दूँ तुम्हे,या दूँ भेंट पुष्पों का गुच्छा मधुर, पर प्रकृति सी सजल तुम स्वयं हो प्रिये,क्या ये उपहार देना उचित...