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भास्कर चौधुरी की दस कविताएं

भास्कर चौधुरीजन्म: 27 अगस्त 1969रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.)शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एडप्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्टा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण, समीक्षा आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।यात्रा:   ...

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हमारी भी छापो! हम भी लेखक-वेखक हैं!

व्यंग्य आलोक प्रकाश एक बहुत ही गुणी साहित्यकार हैं. मुझ से उम्र में बड़े हैं. उनका लिहाज करता हूँ मैं. सर कहकर संबोधित करता हूँ उनको. फ़ेसबुक पर उन्होंने एक ग्रुप बनाया हुआ है. इसमें हम साहित्यकारों की कृतियाँ प्रकाशित होती हैं. ग्रुप तो दूसरे भी हैं लेकिन उनका  स्टैंडर्ड मेरे स्टैंडर्ड...

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भावना की तीन कविताएं

संवेदनाओं का पौधा अधिकांश औरतें जब व्यस्त होती हैं खरीदने में साड़ी और सलवार सूट तो लेखिकाएं खरीदती हैं अपने लिए कुछ किताबें ,पत्रिकाएॅ और कलम अधिकांश औरतें जब ढूंढती हैं इन्टरनेट पर फैशन का ट्रेंड तो लेखिकाएं तलाशती हैं ऑनलाइन किताबों की लिस्ट अधिकांश औरतें जब नाखून में नेलपाॅलिश...

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नीलिमा श्रीवास्तव की दो कविताएं

मै स्त्री मैं स्त्री कभी अपनों ने कभी परायों ने कभी अजनबी सायों ने तंग किया चलती राहों में कभी दर्द में कभी फर्ज में कभी मर्ज में वेदना मिली इस धरती के नरक में कभी शोर में कभी भोर में कभी जोर में संताप सहे अपनी ओर से कभी...

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आरती आलोक वर्मा की दो कविताएं

मैं आज की नारी हूं ढूंढते रहे हर वक्त खामियां दर खामियां दोष मुझमें था या तुम्हारे नजरिए में नापसन्द थी तुम्हेें हर वो चीज, व्यक्ति या परिस्थितियाँ जो मुझे बेहद पसंद थी । मेरे किसी फैसले तक आने से पूर्व, सुना देते अपना निर्णय या फिर धमकियाँ तलाक की...

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डॉ भावना की तीन कविताएं

उस रात उस रात जब बेला ने खिलने से मना कर दिया था तो ख़ुशबू उदास हो गयी थी उस रात जब चाँदनी ने फेर ली अपनी नज़रें चाँद को देखकर तो रो पड़ा था आसमान उस रात जब नदी ने बिल्कुल शांत हो रोक ली थी अपनी धाराएँ तो...

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सुधीर कुमार सोनी की छह कविताएं

बेमिसाल मुहब्बत पानी के गहरे तल में पत्थर है पत्थर के गहरे तल में पानी है पानी है पत्थर है अटूट प्रेम है यह शायद कोई नहीं जानता कि इनके प्रेम की मिसाल दी जाए धीरे-धीरे कटकर प्रेम में सब कुछ मिटा देना पत्थर के सिवाय कोई नहीं जानता युगों-युगों से...

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वेद प्रकाश की तीन प्रेम कविताएं

एक लंबी प्रेम कविता तुम धूप में अपने काले लंबे बाल जब-जब सुखाती हो सूरज का सीना फूल जाता है और पूरे आकाश पर छा जाता है मैंने देखा है गुलमुहर के नीचे बस का इंतजार करते हुए बस आए या न आए तुम्हारी छाया गुलमुहर को चटख कर देती...

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आकांक्षा यादव की तीन कविताएँ 

21वीं सदी की बेटी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी बेटी को माँ ने सिखाये उसके कर्तव्य ठीक वेैसे ही जैसे सिखाया था उनकी माँ ने पर उन्हें क्या पता ये इक्कीसवीं सदी की बेटी है जो कर्तव्यों की गठरी ढोते-ढोते अपने आँसुओं को चुपचाप पीना नहीं जानती है...

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सुधा चौरसिया की तीन कविताएं

संस्कार के कीड़े! जिया तुमने हजारों साल जिस मिथकीय इतिहास में रेंगता है खून में वह तुम्हारे आज भी निकल नहीं पायी अभी तक तुम अपने आदर्श ‘सीता’ के जाल से बोल लेती हो बहुत लिख भी लेती हो बहुत पर झेलती हो अभी तक उस भीषण आग को मत...

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विजय ‘आरोहण’ की नौ कविताएं

सारंडा, जंगल और आदिवासी,जल, जंगम और प्रतिरोध की कवितायें 1. हमारे पहाड़ों के बच्चे हमारे पहाड़ों के बच्चे गिल्ली-डंडा खेलते है वह छुप्पम-छुपाई खेलते शाल के पेड़ों के पीछे छिप जाते हैं वह तीर-धनुषों से निशाना साध रहे हैं इसके लिए वह एक बिजुका बनाते हैं और दनदनाती आती है...

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तन्वी सिंह की कहानी ‘छोटी सी मुलाक़ात’

आज अगर लास्ट मेट्रो मिल जाए बस। कल से कैसे भी जल्दी निकालूँगा। चाहे साला बॉस कुछ भी कहे। लोग वैलेंटाइन वीक मनाने में बिज़ी है। हम साला गर्ल्फ़्रेंड की जगह बॉस को पटा रहे है। ज़िन्दगी ही ख़राब है। दीपक मन ही बड़बड़ता और भागता हुआ मेट्रो स्टेशन के...

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दिनेश शर्मा की दो कविताएं

अशुद्धियों का विधान बच्चा लेता है जन्म किलकारियों के पालने में सूतक घर हो जाता अशुद्ध। एक अर्थी उठती है शोक में डूबा चीखों, आंसूओं व रुंदन का पातक घर अशुद्ध। यौवना सृजन की सम्भावनाओं में खिली हुई मास-दर-मास चढ़ा दी जाती अशुद्धता की सूली। शरीर के अपने ही अंगों...

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रेखा श्रीवास्तव की कविता ‘पुरुष’

कविता लिखना है सोच रही हूँ कि क्या लिखूँ न जाने क्यों सबसे पहले औरत, लड़की और उससे जुड़े मामले ही मन में आते हैं फिर सोचती हूँ कि बहुत लिखा हमने औरतों पर, बहुत चर्चा कर ली हमने लड़कियों पर उनकी आदतों पर, आचरणों पर उनकी बंदिशों पर, उनके...

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सपना मांगलिक के दस हाइकू

1 जितना जिया लिखा बस उतना लिखूं क्या आगे ? 2 मन अन्दर दुःख का समंदर उठे क्यूँ ज्वाला ? । 3 चीखे खामोशी द्वंद नाद दिल में सुने न कोई । 4 मति भ्रमित ह्रदय कुरुक्षेत्र खुलें न नेत्र । 5 फूटी रुलाई भरी सूखी जग की ताल तलाई...

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रेखा श्रीवास्तव की कविता ‘एक स्त्री की दिनचर्या’

एक स्त्री की  दिनचर्या पिछले कई दिनों लड़ाई चल रही है एक स्त्री और एक पत्नी के बीच स्त्री ने कसम खाई है कि वह अपनी आत्मरक्षा, सम्मान के लिए अब नहीं झुकेगी पत्नी का दिल पिघलता है, वैसे ही जैसे पिघलता  आ रहा है कई सालों से अपने दर्द...

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लड़की : सुशील कुमार की पांच कविताएं

एक लड़की के रूप की रजनीगंघा खिली है अभी-अभी उमंग जगी है उसमें अभी-अभी जीवन का रंग चटका है वहाँ अभी–अभी   जरूर उसका मकरंद पुरखों के संस्कार माँ की ममता, पिता के साहस भाई के पसीने और दादी-नानी के दुलार से बना होगा   देखो, कितना टटका दिख रहा वह फूल...

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सीमा संगसार की छह कविताएं

खंडहर स्त्रियाँ जी लेती हैं अपने अतीत रूपी खंडहरों में जो कभी कभी सावन में हरिया जाते हैं — वीरानगी तो उसकी पहचान है जहाँ आवाज दो तो वह पुनः लौट आती है सभी खंडहरों में दफन होते हैं कई राज जिसे स्त्रियों ने दबा कर रखा होता है किसी...

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सुधा चौरसिया की तीन कविताएं

बलात्कारियों के नाम! इस साल तुम मेरी चीखों के नाम एक प्रेम पत्र लिखो लिखो कि हवा तुम्हारे बिना जहरीली है फूल तुम्हारे बिना सौंदर्यहीन है इस साल तुम मेरी चीखों के नाम एक प्रेम पत्र लिखो लिखो कि धरती की हरियाली तुम्हारे बिना नीरस है आकाश की नीलिमा तुम्हारे...

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प्रतिभा चौहान की पांच कविताएं

आज का दिन शताब्दियों ने लिखी है आज अपने वर्तमान की आखिरी पंक्ति आज का दिन व्यर्थ नहीं होगा चुप नहीं रहगी पेड़ पर चिड़िया न खामोश रहेंगी पेड़ों की टहनियाँ न प्यासी गर्म हवा संगीत को पियेगी न धरती की छाती ही फटेगी अंतहीन शुष्कता में न मुरझायेंगे हलों...