डा.अमरजीत कौंके की 12 क्षणिकाएं

अमरजीत कौंके  1सुरमई संध्या कोहरी घास पर उस की आँखों में देखते  सोचा मैंने- अगर सारी जिंदगी यूँ ही गुज़रती तो बस क्षण भर की होती…. 2सुरमई संध्या को हरी घास पर उसके पास बैठे मैंने कहा उस से – कोई बात करो वह बोली -जब ख़ामोशी ख़ामोशी से संवाद कर रही होतो शब्दों को निरर्थक गँवाने का क्या...