सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘एक गुम-सी चोट’

सुशांत सुप्रिय कैसा समय है यह जब बौने लोग डाल रहे हैं लम्बी परछाइयाँ — ( अपनी ही डायरी से ) —————————————————————————————- बचपन में मुझे ऊँचाई से , अँधेरे से , छिपकली से , तिलचट्टे से और आवारा कुत्तों से बहुत डर लगता था । उन्हें देखते ही मैं छिप...