जंतर तो है पर मंतर अब काम नहीं करता

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव दिल्ली होने का मतलब क्या है? सत्ता का केंद्र? ताक़त और पॉवर का गलियारा या इसी सत्ता के लिए बार-बार रक्तरंजित होने वाली एक बेबस-लाचार नगरी? या फिर बार-बार उजड़ कर बस जाने के हौसले का नाम है दिल्ली? अगर ये हौसले का नाम है तो फिर...