Tagged: King

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मार्टिन जॉन की दो कविताएं

मैं ईश्वर की शपथ लेता हूँ   उसने शपथ ली , “मैं ईश्वर की शपथ लेता हूँ ……….” और वह राजा बन गया   इसके पहले मज़हबी क़िताबों की कसमें खा चुका है कई कांडों को सरअंजाम देने के मामले में .   ईश्वर सर्वशक्तिमान है ईश्वर उसे शक्ति देगा...

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कुमार वीरेंद्र की पांच कविताएं

भोट मुझे याद है वह दिन, जब बाबा ने कहा था तू पहली बार भोट देने जा रहा, तो बेटा किसी नेता को देखकर नहीं, अपने जंग लग रहे हल को देखकर, भोट देना कि बेटा, जब तक नेताओं को, सिर्फ़ नेताओं को देखकर, भोट दिए जाते रहेंगे हत्यारे कबूतर...

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राज्यवर्द्धन की तीन कविताएं

राज्यवर्द्धन एकांत भीड़  में एकांत की तलाश एकांत में एक अदद चेहरे की ललक अकुलाने लगते हैं शब्द नि:शब्द में स्मृतिहीन कैसे बन जाऊँ वह भी तो संचित सम्पदा है कलकल छलछल की अहिर्निश ध्वनि बीच सुनना चाहता है कान किसी चिर -परिचित की मधुर तान खेल चॊर सिपाही मंत्री...

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बुद्धिलाल पाल की तीन कविताएं

बुद्धिलाल पाल असंतोष जनता का असंतोष राजा के राज्य में पानी के बुलबुलों-सा उठता …… फुस्स हो जाता राजा जनता को स्वामी-भक्ति सिखाता उसकी जड़ों में मठा डालता जनता से हाय-हलो, कैसे हो कहता दारू वालों को दारू भीख वालों को भीख निकम्मे ज्ञानवादियों को दान अपने सूबेदारों को सूबे...