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चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव की सात कविताएं

जब कविताएं नहीं होंगी सोचो जरा ऐसे कल के बारे में जब कविताएं नहीं होंगी सोचो जब गीतों में सुर नहीं होंगे सोचो जब आल्हा चैती के स्वर नहीं होंगे सोचो जब ताल, धुन और लय नहीं होंगे सोचो जब किस्से और किस्सागो नहीं होंगे सोचो जब बच्चे सपने देखना...

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संजीव ठाकुर की कविता ‘वे भूल गए’

वे भूल गए वे दिन जब बाढ़ में डूबे गाँव से निकलते थे सतुआ खाकर चिलचिलाती धूप में जाते थे शहर के कॉलेज नंगे पाँव ! अब वे महानगर में माल रोड पर रहते हैं चार कमरों के मकान में ए॰सी॰ में सोए बगैर नहीं निकलता पेट का पाखाना कमोड...

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मनोज चौहान की तीन कविताएं

ऐ कविता   दस्तक देना तुम कभी ऐ कविता दिनभर कमर तोड़ चुके ईंट-भठ्ठे के मजदूरों की उन बास छोड़ती झुग्गियों में बीड़ी के धुंएं और सस्ते देशी ठर्रे के घूंट पीकर जो चाहते हैं मिटा देना थकान और चिंताओं को व भीतर उपजती वेदना को भी और बुनते हैं सपनों...

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দেবারতী পাঠক চ্যাটার্জীর গল্প “এক বৈশাখে দেখা হল দুজনায়…”

এই সুন্দর স্বর্নালী সন্ধায়…. একটানা গানের আওয়াজ ভেসে আসছে পাশের বাড়ি থেকে।   মল্লিকা দি গান গাইছে। খুব সুন্দর গান গায় মল্লিকা দি। কি মিঠে গলা। রোজ ভোরে মল্লিকা দির রেওয়াজের সুরেই ঘুম ভাঙ্গে আমার। প্রথমে সা ধরে রেওয়াজ চলে বেশ কিছুক্ষন।  ভৈরব-ভৈরবীর সুরে আর ভোরের আধো অন্ধকারে চোখ খুলি...

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आरती आलोक वर्मा की दो कविताएं

मैं आज की नारी हूं ढूंढते रहे हर वक्त खामियां दर खामियां दोष मुझमें था या तुम्हारे नजरिए में नापसन्द थी तुम्हेें हर वो चीज, व्यक्ति या परिस्थितियाँ जो मुझे बेहद पसंद थी । मेरे किसी फैसले तक आने से पूर्व, सुना देते अपना निर्णय या फिर धमकियाँ तलाक की...

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লাভ ইউ জিন্দেগি

আলমগীর ইমন ‘Love you zindagi, Love you zindagi, Love you zindagi, Love me zindagi…’ হঠাৎ গান শুরু করলাম কেনো? তাও আবার বাংলা নয়, হিন্দি গান! cবান্দরবান শহর থেকে চাঁদের গাড়িতে (ছাউনিহীন ছোট জীপ) করে যখন স্বর্ণমন্দির, সেখান থেকে নীলাচল এবং সর্বশেষ নীলাচল থেকে ফিরতে মেঘলা (বাস পার্ক) কয়েকজনকে খুব কাছ...

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नूर मुहम्मद नूर की पांच ग़ज़लें

एक क्या पता क्यों खुशी सी होती है ज़िन्दगी ज़िन्दगी सी होती है ऐ अंधेरो! अभी जरा ठहरो मुझमें कुछ रौशनी सी होती है किससे पुछूं, कोई बतलाए क्यों? दोस्ती दुश्मनी सी होती है दिल भी घबरा रहा है हैरत से उसमें कुछ आशिक़ी सी होती है कौन बतालाए शायरी...

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प्रतिभा चौहान की पांच कविताएं

||हमारे फूल -तुम्हारे नक्शे|| तुम्हें उलझे हुए आदमी हो तुम सुलझा नहीं  सके समय की लट को तुमने नहीं सीखा खुशियों से खेलना तुम्हें नहीं आता सीधे सरल सवालों का जवाब देना तुमने तो यह भी नहीं समझा कि डूबते हुए आदमी को तिनके का सहारा होता है तुमने नहीं...

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ময়ূরী পাঁজার পাঁচটি অনুগল্প

১ তিথির শাড়ি ও গয়নার কালেকশন দেখে সবাই হিংসে করে,  সে  বাড়ির লোকজন হোক বা পার্টিতে.. কতজন ঠোঁট বেঁকায় হিংসায়!! কেউ জানে না___ অন্যের গোছানো সংসারে স্বামী সন্তানদের দেখে  কত রাত বালিশের বুক ভেজে। ২ ” উম্ ম্ ম্, তন্দুর চিকেন হচ্ছে, রুমালী রুটি দিয়ে খাব। এইইই ছোকরা এখানে দিয়ে...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के आने वाले उपन्यास ‘ये इश्क बड़ा आसां’ एक अंश

उसने ध्यान से अहोना की ओर देखा। 50 फीसदी से ज्यादा बाल सफेद हो गए थे। कच्चे-पके बालों की मिलावट ने उसके व्यक्तित्व को और निखार दिया था। उम्र 55 के आसापास तो थी ही लेकिन चेहरे पर बुढ़ापे की दस्तक अभी नहीं पड़ी थी। गोरा चेहरा पहले की तरह...

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अनिरुद्ध सिन्हा की पांच ग़ज़लें

एक राह की  दुश्वारियों  के रुख  बदलकर देखते जिस्म घायल ही सही कुछ दूर चलकर देखते   नींद में ही मोम बनकर ख़्वाब से की गुफ्तगू दोपहर की  धूप में  थोड़ा  पिघलकर  देखते   कुछ तजुर्बों के  लिए  ही दोस्तो इस दौर में देश की मिट्टी कभी  माथे पे मलकर ...

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चन्द्रप्रकाश श्रीवास्तव की छह कविताएं

गतिमान हने दो समय को भागता है समय तो भागने दो समय को कुलाचें भरने दो समय चीखता-चिल्लाता है तो चीखने चिल्लाने दो समय अकुलाता है तो अकुलाने दो समय विलाप करता है तो सुनो समय का विलाप अच्छा है समय का गतिमान रहना कुलाचें भरना चीखना-चिल्लाना हांफना और विलाप...

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तरसेम कौर की कहानी ‘खूबसूरत घाव’

कहानी एक बड़ा सा आलीशान पुराना घर था। वहाँ चालीस बरस की एक औरत अपने पति,  एक बेटे और एक बेटी के साथ रहती थी। उसके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान धरी रहती थी । सुन्दर सी साड़ी और उससे मैचिंग करती बिंदी और हल्के से गुलाबी रंग की लिपिस्टक...

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डॉ भावना की तीन कविताएं

उस रात उस रात जब बेला ने खिलने से मना कर दिया था तो ख़ुशबू उदास हो गयी थी उस रात जब चाँदनी ने फेर ली अपनी नज़रें चाँद को देखकर तो रो पड़ा था आसमान उस रात जब नदी ने बिल्कुल शांत हो रोक ली थी अपनी धाराएँ तो...

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देवेंद्र कुमार की पांच कविताएं

आंखों में पानी  डॉक्टर ने कहा आंखों में ड्रायनेस है आंसू नहीं बनते अब कुछ दिनों में दिखना भी बंद हो जाएगा दिखना बंद होने से पहले ही बंद हो गए आंसू देखकर भी नहीं बहता आंखों से आंसू चाहे कुछ भी देख लो डॉक्टर ने कहा प्रदूषण बढ़ गया...

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सुधीर कुमार सोनी की छह कविताएं

बेमिसाल मुहब्बत पानी के गहरे तल में पत्थर है पत्थर के गहरे तल में पानी है पानी है पत्थर है अटूट प्रेम है यह शायद कोई नहीं जानता कि इनके प्रेम की मिसाल दी जाए धीरे-धीरे कटकर प्रेम में सब कुछ मिटा देना पत्थर के सिवाय कोई नहीं जानता युगों-युगों से...

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प्रसून परिमल की दो कविताएं

प्रेम-कहानी का एक ‘ पाठक ‘ हूँ… पता है, मुझे प्रेम कहानियाँ पढ़नी अच्छी लगती है..बहुत अच्छी लगती है मैं पढ़ना चाहता हूँ एक-एक प्रेम-कहानी..एक-एक-की प्रेम-कहानी..हर्फ़- हर्फ़..शब्द-शब्द मैं दुनिया की सारी प्रेम कहानियाँ पढ़ना चाहता हूँ सच..तुम्हारी भी ..तुम्हारी भी..और तुम्हारी भी… मैं हर प्रेमी-ह्रदय की संजो-संजो रखी बेशक़ीमती अक्षय...

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महिला दिवस पर डॉ सुलक्षणा अहलावत की कविता

सीता के रूप में मेरी अग्नि परीक्षा लेते हो, द्रौपदी रूप में जुए के दांव पर लगा देते हो, फिर भी तुम महिला दिवस मनाते हो। कभी सती के नाम पर चिता में जला देते हो, कभी जौहर के नाम पर अग्नि में कूदा देते हो, फिर भी तुम महिला...

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जयप्रकाश मानस की 10 कविताएं

मित्र होता है हरदम लोटे में पानी – चूल्हे में आग होता है हरदम जलन में झमाझम – उदासी में राग   दुर्दिन की थाली में बाड़ी से बटोरी हुई उपेक्षित भाजी-साग रतौंदी के शिविर में मिले सरकारी चश्मे से दिख-दिख जाता हरियर बाग   नहीं होता मित्र राजधानी में...

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नवनीत शर्मा की पांच ग़ज़लें

एक कुछ मेरा उस पार जिंदा है अभी जब कि ये दीवार जिंदा है अभी मेरी हां मजबूरियों का ढोल है दिल में तो इनकार जि़ंदा है अभी हर तरफ है धुंध नफरत की मगर इस जहां में प्‍यार जिंदा है अभी खुदकुशी कर ली कबीले ने मगर एक अदद...