Tagged: LONELINESS

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পামেলা চক্রবর্তীর কবিতা “একটি রূপকথার জন্ম!”

   সব শব্দের অর্থ থাকলে অর্থহীন শব্দেরা নিঃশব্দ হয়ে যায়।           “হাজার কথা”র ভীড়…                     নিঃশব্দ হলে মন্দ কি? তবে ,সেইদিন, এক ‘সাধারণ’ছেলে….                     যখন এক ‘অ’ মেয়ের...

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দেবারতী পাঠক চ্যাটার্জীর গল্প “এক বৈশাখে দেখা হল দুজনায়…”

এই সুন্দর স্বর্নালী সন্ধায়…. একটানা গানের আওয়াজ ভেসে আসছে পাশের বাড়ি থেকে।   মল্লিকা দি গান গাইছে। খুব সুন্দর গান গায় মল্লিকা দি। কি মিঠে গলা। রোজ ভোরে মল্লিকা দির রেওয়াজের সুরেই ঘুম ভাঙ্গে আমার। প্রথমে সা ধরে রেওয়াজ চলে বেশ কিছুক্ষন।  ভৈরব-ভৈরবীর সুরে আর ভোরের আধো অন্ধকারে চোখ খুলি...

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प्रतिभा चौहान की पांच कविताएं

||हमारे फूल -तुम्हारे नक्शे|| तुम्हें उलझे हुए आदमी हो तुम सुलझा नहीं  सके समय की लट को तुमने नहीं सीखा खुशियों से खेलना तुम्हें नहीं आता सीधे सरल सवालों का जवाब देना तुमने तो यह भी नहीं समझा कि डूबते हुए आदमी को तिनके का सहारा होता है तुमने नहीं...

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ময়ূরী পাঁজার পাঁচটি অনুগল্প

১ তিথির শাড়ি ও গয়নার কালেকশন দেখে সবাই হিংসে করে,  সে  বাড়ির লোকজন হোক বা পার্টিতে.. কতজন ঠোঁট বেঁকায় হিংসায়!! কেউ জানে না___ অন্যের গোছানো সংসারে স্বামী সন্তানদের দেখে  কত রাত বালিশের বুক ভেজে। ২ ” উম্ ম্ ম্, তন্দুর চিকেন হচ্ছে, রুমালী রুটি দিয়ে খাব। এইইই ছোকরা এখানে দিয়ে...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के आने वाले उपन्यास ‘ये इश्क बड़ा आसां’ एक अंश

उसने ध्यान से अहोना की ओर देखा। 50 फीसदी से ज्यादा बाल सफेद हो गए थे। कच्चे-पके बालों की मिलावट ने उसके व्यक्तित्व को और निखार दिया था। उम्र 55 के आसापास तो थी ही लेकिन चेहरे पर बुढ़ापे की दस्तक अभी नहीं पड़ी थी। गोरा चेहरा पहले की तरह...

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तरसेम कौर की कहानी ‘खूबसूरत घाव’

कहानी एक बड़ा सा आलीशान पुराना घर था। वहाँ चालीस बरस की एक औरत अपने पति,  एक बेटे और एक बेटी के साथ रहती थी। उसके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान धरी रहती थी । सुन्दर सी साड़ी और उससे मैचिंग करती बिंदी और हल्के से गुलाबी रंग की लिपिस्टक...

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देवेंद्र कुमार की पांच कविताएं

आंखों में पानी  डॉक्टर ने कहा आंखों में ड्रायनेस है आंसू नहीं बनते अब कुछ दिनों में दिखना भी बंद हो जाएगा दिखना बंद होने से पहले ही बंद हो गए आंसू देखकर भी नहीं बहता आंखों से आंसू चाहे कुछ भी देख लो डॉक्टर ने कहा प्रदूषण बढ़ गया...

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नवनीत शर्मा की पांच ग़ज़लें

एक कुछ मेरा उस पार जिंदा है अभी जब कि ये दीवार जिंदा है अभी मेरी हां मजबूरियों का ढोल है दिल में तो इनकार जि़ंदा है अभी हर तरफ है धुंध नफरत की मगर इस जहां में प्‍यार जिंदा है अभी खुदकुशी कर ली कबीले ने मगर एक अदद...

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अमरजीत कौंके की पांच कविताएं

साहित्य अकादमी, दिल्ली ने पंजाबी के कवि , संपादक और अनुवादक डा. अमरजीत कौंके सहित 23 भाषाओँ के लेखकों को वर्ष 2016 के लिए अनुवाद पुरस्कार देने की घोषणा की है. अमरजीत कौंके को यह पुरस्कार पवन करन की पुस्तक ” स्त्री मेरे भीतर ” के पंजाबी अनुवाद ” औरत मेरे...

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शहंशाह आलम की छह कविताएं

हमला हम गहरे, बेहद गहरे अँधकार भरे युग को जी रहे हैं जिसमें हम प्रेम करते हैं तो हम पर हमले किए जाते हैं एक सफल हत्या एक सफल बलात्कार के लिए सम्मानित अब उनके शब्दों के वर्ण विन्यास, अर्थ, प्रयोग, व्युपत्ति, पर्याय यही थे कि उन्हें भेड़ों के साथ...

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सीमा संगसार की छह कविताएं

खंडहर स्त्रियाँ जी लेती हैं अपने अतीत रूपी खंडहरों में जो कभी कभी सावन में हरिया जाते हैं — वीरानगी तो उसकी पहचान है जहाँ आवाज दो तो वह पुनः लौट आती है सभी खंडहरों में दफन होते हैं कई राज जिसे स्त्रियों ने दबा कर रखा होता है किसी...

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कृष्ण सुकुमार की सात कविताएं

(1) उन दिनों जब हम बच्चे ही थे, तुम कहीं नहीं थे ! न तुम्हारी कोई कल्पना थी, न धारणा, न उपस्थिति न आकार ही कोई ! किंतु एक उत्कट बेचैन अभिलाषा तुम्हें छू लेने की… तुम्हारा साथ पाने की… क्या था वह सब ! हम साथ साथ खेलते साथ...

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मनीष वैद्य की कहानी ‘एक्वेरियम में मछलियां’

कल दोपहर की ही बात थी। तान्या दरवाजे को ठेलती हुई हवा के झोंके के मानिंद घर में घुसी थी। बस्ता सोफे पर फेंकते हुए पैरों से ही जूते दाएं और बाएं कोनों की ओर उछाल दिए। वह दौड़ते हुए अपनी मम्मी के गले में दोनों हाथ डाले झूलने लगी।...

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क़ैस जौनपुरी की कहानी ‘सफ़ेद दाग़’

इला बड़ी देर से बस के आने का इन्तज़ार कर रही थी. काफ़ी लम्बे इन्तज़ार के बाद जब बस आई, तो इला भीड़ के साथ बस में चढ़ तो गई, लेकिन बैठने के लिए उसे सीट नहीं मिली. उसने भीड़ से खचा-खच भरी हुई बस से उतर जाना चाहा, ये...

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प्रमोद बेड़िया की कविता ‘आदतों के साथ’

आदतों के साथ पुराने घर में कई आदतें पड़ी हैं जिन्हें जगह की जगह पड़े रहने नहीं दिया वहाँ के लोगों ने जब मैं नहा कर बाहर लगे आईने के फ़्रेम पर रखी कंघी टटोल रहा था तो ख़ाली जगह हाथ आई उसे लेकर मैं क्या करता मेरी आदतों से...

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सुधांशु गुप्त की कहानी ‘सामान के बीच रखा पियानो’

दोपहर के चार…साढ़े चार या पांच बजे हैं। अक्तूबर का महीना है। 8….9 या 10 तारीख। उसने अपने घर में प्रवेश किया है। घर में व्हाइट वाश और पेंट का काम चल रहा है। बड़ा बेटा अभी काॅलेज से नहीं आया है और छोटा बेटा स्कूल से आकर ट्यूशन जा...

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मनोज कुमार झा की पांच कविताएं

एक सिर्फ़ ध्वनि की स्मृतियों में एकाकी है तेरी तलाश अनन्त अबूझ प्रेम। दो जब खाना नहीं मिलेगा नून तेल भात रोटी तो छोड़ो माटी को कोड़ोगे तो मूस भी नहीं मिलेगा केकड़ा बेंग भर-भर जाँघ पानी में डोड़वाँ साँप भी नहीं मिलेगा खेत में जब कुछ जन्मेगा ही नहीं...

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सुशील कुमार की पांच कविताएं

एक जितने दृश्य दर्पण ने रचे थे वे सब उनके टूटने से बिखर गए रेत पर लिखी कविताएँ लहरें अपने साथ नदी बीच ले गई अब जो रचूँगा, सहेजकर रखूँगा हृदय के कागज पर अकथ लिखूंगा l ● दो एक रीते समय में न सुख न दुःख न चाह न...

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संजीव ठाकुर की पांच कविताएं

प्यासा हथेलियों में दम कहाँ उठा पाने की एक बूँद खुशी ?   और फिर भोजन भी तो चाहिए अंधे कुएं को ! क्या तुम जानते हो — मेरे शरीर का हरेक रंध्र एक –एक कुआँ है बहुत गहरा बहुत प्यासा चट विलीन हो जाती है बमुश्किल मिली एक बूँद...

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राज्यवर्द्धन की तीन कविताएं

राज्यवर्द्धन एकांत भीड़  में एकांत की तलाश एकांत में एक अदद चेहरे की ललक अकुलाने लगते हैं शब्द नि:शब्द में स्मृतिहीन कैसे बन जाऊँ वह भी तो संचित सम्पदा है कलकल छलछल की अहिर्निश ध्वनि बीच सुनना चाहता है कान किसी चिर -परिचित की मधुर तान खेल चॊर सिपाही मंत्री...