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ময়ূরী পাঁজার গল্প ‘বৈশাখী উপহার’

সুবর্ণপ্রভা দেবী বসে আছেন পালঙ্কের চূড়োর গায়ে হেলান দিয়ে , কোলে একটা অ্যালবাম। যে পালঙ্কে হেলান দিয়ে আছেন,  অনেক বড়,  দুদিকে দুটো চূড়ো। সামনে দুটো বড় বড় জানলা। জানলার ওপারে পুকুর ,  কয়েকটা ছেলে ঝা়ঁপাই জুড়েছে। পুকুরের ওপারে মাঠ,  রোদ্দুরে খাঁ খাঁ করছে।  মাথার উপর পাখাটা ঘটাং ঘটাং শব্দ করে...

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अर्जित पाण्डेय की कविता ‘यादों के दरीचों से’

एक हसीन ख़्वाब कागज़ की तरह मोड़कर दिल के कमरे में बने यादों के दरीचे पर मैंने रख दिए है धूमिल न हो जाए वो पन्ना इसलिए अक्सर उसे अपने आंसुओ से धोता हूँ उस  ख़्वाब को सजाने में वक्त की कितनी सीमाएं लांघी हमने, ये सोचता हूँ उस पन्ने...